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Thursday, May 21, 2026
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    Good News : “अब सिर्फ किताबों से नहीं चलेगी पढ़ाई!”, ग्रेटर नोएडा के आईटीएस डेंटल कॉलेज में शिक्षकों को मिला ‘स्मार्ट टीचिंग’ का मंत्र, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम बना चर्चा का केंद्र, शिक्षकों ने नई तकनीकों को सीखने में दिखाई रुचि

    Good News: “Now studies will not be done only through books!”, In ITS Dental College, Greater Noida, teachers got the mantra of ‘Smart Teaching’, Faculty Development Program became the center of discussion, teachers showed interest in learning new technologies.

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज़ क्लिक।
    तेजी से बदलती तकनीक, डिजिटल शिक्षा और छात्रों की बदलती सोच के दौर में अब पारंपरिक पढ़ाई का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। इसी बदलाव को समझते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित आईटीएस डेंटल कॉलेज में शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा पद्धति से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, इंटरैक्टिव और छात्रों के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन 19 मई से 21 मई 2026 तक किया गया, जिसमें कॉलेज के शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, छात्र मनोविज्ञान और प्रभावी कक्षा प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह था कि शिक्षकों को ऐसे नए और रोचक तरीके सिखाए जाएं, जिनसे छात्र पढ़ाई के प्रति अधिक आकर्षित हों और कक्षा में उनकी भागीदारी बढ़े।

    “विद्यार्थियों की सोच समझे बिना अच्छी शिक्षा संभव नहीं”

    कार्यक्रम के दौरान संस्थान के प्राचार्य डॉ. ओमकार के. सेटी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में केवल किताबों का ज्ञान देना ही पर्याप्त नहीं है। छात्रों की मानसिकता, उनकी रुचियों और सीखने के तरीके को समझना भी उतना ही जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा— “यदि शिक्षक विद्यार्थियों की मनोदशा और उनकी जरूरतों को समझकर पढ़ाएंगे, तो शिक्षा अधिक प्रभावी बनेगी और छात्रों का कक्षा के प्रति रुझान स्वतः बढ़ेगा।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए पाठ्यक्रम को सरल, रोचक और व्यवहारिक बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

    डिजिटल युग में बदल रही है पढ़ाई की परिभाषा

    तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में यह समझाने का प्रयास किया गया कि इंटरनेट, कंप्यूटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव ने शिक्षा की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब छात्र केवल ब्लैकबोर्ड आधारित शिक्षा से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वे इंटरैक्टिव और टेक्नोलॉजी आधारित लर्निंग की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने शिक्षकों को बताया कि यदि पढ़ाई को छात्रों के लिए रोचक बनाया जाए, तो उनकी उपस्थिति, सहभागिता और परिणाम—तीनों में सुधार संभव है।

    एसएनडीटी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

    इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में एसएनडीटी विश्वविद्यालय (CEAPS) से जुड़े शिक्षा विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. आस्था चौधरी, श्रीमती मोनिका शर्मा और डॉ. अरविंद कोर पवला रहे। इन विशेषज्ञों ने शिक्षकों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया, जिनमें— प्रभावी कक्षा प्रबंधन
    विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने के तरीके
    आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली
    व्यवहारिक और परिणाम-आधारित शिक्षण
    पाठ्यक्रम को अधिक आकर्षक बनाना जैसे विषय प्रमुख रहे।

    फीडबैक आधारित शिक्षा पर दिया गया जोर

    कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि हर कक्षा और कोर्स के बाद छात्रों से फीडबैक लेना जरूरी है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि विद्यार्थी किस तरह की शिक्षा पद्धति को अधिक पसंद कर रहे हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
    डॉ. ओमकार के. सेटी ने कहा कि—“समय-समय पर विद्यार्थियों के सुझावों के आधार पर पाठ्यक्रम और शिक्षण शैली में बदलाव होना चाहिए। यही आधुनिक शिक्षा का मूल आधार है।”

    “अब सिर्फ पढ़ाना नहीं, छात्रों को प्रेरित करना भी जरूरी”

    आईटीएस द एजुकेशन ग्रुप के उपाध्यक्ष श्री सोहिल चड्ढा ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि आज शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब केवल किताबों का ज्ञान देना ही शिक्षक की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि छात्रों को प्रेरित करना, उनकी भागीदारी बढ़ाना और उन्हें वास्तविक दुनिया के लिए तैयार करना भी उतना ही आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा—“आज का विद्यार्थी केवल जानकारी नहीं चाहता, बल्कि अनुभव आधारित सीखने को महत्व देता है। ऐसे में शिक्षकों को भी लगातार खुद को अपडेट करना होगा।”

    शिक्षकों में दिखा उत्साह, नई तकनीकों को सीखने में दिखाई रुचि

    तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में शामिल शिक्षकों ने भी आधुनिक शिक्षा पद्धतियों को लेकर काफी उत्साह दिखाया। कई शिक्षकों ने माना कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें छात्रों से बेहतर जुड़ने और पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करते हैं।

    शिक्षा को भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में अहम पहल

    आईटीएस डेंटल कॉलेज का यह प्रयास केवल शिक्षकों के प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षकों को समय-समय पर इस प्रकार का प्रशिक्षण मिलता रहा, तो शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत और प्रभावी बन सकती है।

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