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Saturday, July 4, 2026
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    Breaking News : ‘पेरिस ऑफ इंडिया’ के दावों पर सवाल!, अल्फा-1 का अशोक वाटिका पार्क बदहाली का शिकार, सेक्टरवासियों का फूटा गुस्सा, करोड़ों के विज्ञापन के दावों के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सबसे बड़ी नाकामी

    Alpha-1's Ashok Vatika Park is a victim of deterioration, the residents of the sector are angry

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रेटर नोएडा को “पेरिस ऑफ इंडिया” बनाने के दावों के बीच सेक्टर अल्फा-1 स्थित अशोक वाटिका पार्क की बदहाल स्थिति प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। कभी शहर के सबसे सुंदर और आकर्षक पार्कों में गिनी जाने वाली अशोक वाटिका आज गंदगी, टूटी हुई सुविधाओं, अंधेरे और असुरक्षा का प्रतीक बन चुकी है। पार्क की जर्जर हालत से नाराज स्थानीय लोगों और एक्टिव सिटीजन टीम ने प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जल्द सुधार की मांग की है।

    शनिवार को एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य हरेंद्र भाटी ने सेक्टरवासियों के साथ पार्क का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पार्क में जगह-जगह कूड़े के ढेर, सूखे पत्तों का अंबार, टूटी बेंचें, क्षतिग्रस्त फुटपाथ, खराब लाइटें और टूटी बाउंड्री वॉल जैसी कई गंभीर खामियां सामने आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही पार्क अंधेरे में डूब जाता है, जिससे असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है और महिलाएं तथा वरिष्ठ नागरिक यहां आने से कतराने लगे हैं।

    हरेंद्र भाटी ने प्राधिकरण पर निशाना साधते हुए कहा कि एक्टिव सिटीजन टीम हमेशा जनता की आवाज बनकर काम करती है, लेकिन अफसोस की बात है कि समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद प्राधिकरण की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इच्छाशक्ति दिखाएं तो शहर और गांव दोनों का बेहतर विकास संभव है, लेकिन वर्तमान हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।
    पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामशरण नागर ने कहा कि वह वर्ष 2001 से अल्फा-1 में रह रहे हैं। एक समय था जब अशोक वाटिका में आसपास के कई सेक्टरों के लोग सुबह-शाम सैर करने आते थे, लेकिन अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों ने यहां आना कम कर दिया है। उन्होंने बताया कि पार्क में न तो नियमित माली हैं, न पर्याप्त रोशनी, न शौचालय और न ही सुरक्षा की व्यवस्था। हालात ऐसे हैं कि सेक्टरवासी चंदा इकट्ठा कर स्वयं पौधों को पानी देने के लिए मजबूर हैं।
    स्थानीय निवासी एन.सी. शर्मा ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों से पार्क का समुचित रखरखाव नहीं हुआ है। कई पेड़ सूखने लगे हैं और बाउंड्री वॉल भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। वहीं मनीष डावर ने कहा कि जो पार्क कभी स्वर्ग जैसा प्रतीत होता था, आज वहां गंदगी और कूड़े के ढेर दिखाई देते हैं।

    पवन गोयल ने सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि शाम के समय पार्क असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है। महिलाएं और बच्चे खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही स्मार्ट सिटी और “पेरिस ऑफ इंडिया” की परिकल्पना है?

    सेक्टरवासियों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि पार्क में तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाकर कूड़ा और सूखे पत्ते हटाए जाएं, टूटी हुई बेंच, फुटपाथ और बाउंड्री वॉल की मरम्मत कराई जाए, नियमित माली और सफाई कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, एलईडी लाइटें और सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराए जाएं तथा महिला एवं पुरुष शौचालय का निर्माण कराया जाए। साथ ही पार्क के रखरखाव की जिम्मेदारी तय कर जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।

    इस दौरान हरेंद्र भाटी, एन.सी. शर्मा, पवन गोयल, एडवोकेट श्रीचंद्र छावड़िया, एडवोकेट रामशरण नागर, मनीष डावर, सौदान सिंह, उमेश गर्ग, मधुसूदन गोयल, राकेश जैन, पवन गर्ग, पुष्पेंद्र गोयल, ऋषि त्यागी, अनिल गुप्ता, एल.पी. गुप्ता, राजीव सिंघल, रजनीकांत अग्रवाल, मनोज गर्ग, अनिल सिंघल, अशोक अग्रवाल, अमित सिंघल, डॉ. आर.के. शर्मा, मूलचंद प्रजापति, गिरीश जिंदल, राकेश सिंघल, के.के. शर्मा, मोहन अग्रवाल, सत्यप्रकाश अग्रवाल, सुभाष लाला अग्रवाल, वीपुल गर्ग, सुनील चौधरी, सूरज कुमार सहित बड़ी संख्या में सेक्टरवासी मौजूद रहे।

    स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्राधिकरण ने जल्द ही पार्क की बदहाली दूर करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्रवासी व्यापक जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि केवल बड़े-बड़े दावे और विज्ञापन नहीं, बल्कि धरातल पर विकास कार्य दिखाई देने चाहिए।

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