नोएडा, द न्यूज क्लिक। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में जीएसटी रिफंड में हो रही देरी को लेकर उद्योग जगत की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) लंबे समय तक विभाग में फंसे रहने से विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। इसी गंभीर विषय को लेकर नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (NEA) का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन के नेतृत्व में नव नियुक्त अपर आयुक्त, वस्तु एवं सेवा कर (GST) परीक्षित खटाना से सेक्टर-148 स्थित कार्यालय में मिला। इस दौरान उद्यमियों ने जीएसटी रिफंड, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर और भौतिक सत्यापन जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए शीघ्र समाधान की मांग की।
नव नियुक्त अपर आयुक्त का किया स्वागत, बेहतर समन्वय की जताई उम्मीद
बैठक की शुरुआत में एनईए अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन तथा संस्था के सचिव एवं जीएसटी समिति के चेयरमैन डॉ. आलोक कुमार गुप्ता ने परीक्षित खटाना का गौतमबुद्ध नगर में अपर आयुक्त का कार्यभार संभालने पर स्वागत एवं अभिनंदन किया। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में जीएसटी विभाग और उद्योग जगत के बीच बेहतर संवाद स्थापित होगा तथा उद्यमियों की लंबित समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
GST NEXT GEN Reform 2.0 के बाद बढ़ीं रिफंड की समस्याएं
एनईए अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन ने बैठक में विस्तार से बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सितंबर 2025 में लागू किए गए GST Next Gen Reform 2.0 के बाद कई वस्तुएं इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (Inverted Duty Structure) के दायरे में आ गई हैं। इसके कारण अनेक उद्योगों को नियमित रूप से विभाग से जीएसटी रिफंड लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे मामलों में सात दिनों के भीतर प्रोविजनल रिफंड देने की व्यवस्था बनाई थी, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर अधिकांश उद्यमियों को यह सुविधा नहीं मिल रही है। कई मामलों में अंतिम रिफंड तो मिल जाता है, लेकिन उसमें भी 60 दिन या उससे अधिक समय लग जाता है, जिससे उद्योगों की नकदी व्यवस्था प्रभावित होती है।

NEA के अध्यक्ष विपिन मल्हन बोले वर्किंग कैपिटल फंसने से MSME पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए कार्यशील पूंजी सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि करोड़ों रुपये का टैक्स रिफंड महीनों तक विभाग में अटका रहता है तो उद्योगों का उत्पादन, भुगतान और विस्तार प्रभावित होने लगता है। एनईए ने बताया कि कई उद्यमी केवल इसलिए वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं क्योंकि उनका वैध रिफंड समय पर जारी नहीं हो पा रहा है। कुछ इकाइयों के सामने उत्पादन घटाने या संचालन बंद करने जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो रही हैं।
भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया आसान बनाने की मांग
बैठक में उद्यमियों ने यह भी मांग उठाई कि छोटे एवं मध्यम उद्योगों के मामलों में बार-बार होने वाले भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। उनका कहना था कि सभी दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध होने के बावजूद कई मामलों में अनावश्यक निरीक्षण किए जाते हैं, जिससे रिफंड और अधिक विलंबित हो जाता है। इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि जिन आवेदनों में विभाग की ओर से कमी संबंधी ज्ञापन (Deficiency Memo) जारी किए जाते हैं, उनका भी समयबद्ध निस्तारण किया जाए ताकि उद्यमियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
पूंजीगत वस्तुओं पर टैक्स रिफंड का भी उठाया मुद्दा
एनईए ने इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) एवं विभिन्न सेवाओं पर भुगतान किए गए टैक्स के रिफंड का मुद्दा भी उठाया। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इन मदों पर रिफंड न मिलने से उद्योगों की बड़ी राशि लंबे समय तक फंस जाती है, जिससे नई परियोजनाओं और निवेश पर असर पड़ता है।उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से इस नीति की समीक्षा कर उद्योगों को राहत देने की मांग भी की।

अपर आयुक्त परीक्षित खटाना ने दिया सकारात्मक आश्वासन
उद्यमियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद अपर आयुक्त परीक्षित खटाना ने कहा कि जीएसटी से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भी पारदर्शी और समयबद्ध कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश देने की बात कही। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी माह एनईए सभागार में उद्यमियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें जीएसटी से जुड़े सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा होगी। इसके अलावा प्रत्येक माह दो से तीन जीएसटी खंडों को शामिल करते हुए नियमित बैठकें आयोजित करने का भी आश्वासन दिया, ताकि समस्याओं का स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान किया जा सके।
उद्योग और विभाग के बीच बेहतर संवाद की उम्मीद
बैठक के बाद उद्योग प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि नए नेतृत्व में विभाग और उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। यदि रिफंड प्रक्रिया तेज होती है और अनावश्यक औपचारिकताओं को कम किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ हजारों उद्योगों और लाखों कर्मचारियों को मिलेगा। बैठक में एनईए अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन, सचिव डॉ. आलोक कुमार गुप्ता, अतुल कांत वर्मा, अनिल गुप्ता, संदीप विरमानी सहित कई उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

