नोएडा, द न्यूज क्लिक। दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और समावेशी समाज के निर्माण का एक प्रेरणादायक दृश्य शनिवार को नोएडा के सेक्टर-122 स्थित कम्युनिटी हॉल में देखने को मिला। अवसर था फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के दूसरे स्थापना दिवस समारोह का, जहां सेवा, संवेदना और समर्पण का ऐसा संगम दिखाई दिया जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। समारोह में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने जरूरतमंद दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल, सामान्य ट्राइसाइकिल और व्हीलचेयर वितरित कर उन्हें आत्मनिर्भर जीवन की नई राह दिखाई। वहीं, देश के प्रख्यात शिक्षाविद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने समाज से दिव्यांगजनों की प्रतिभा को पहचानने, उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने और शिक्षा व कौशल विकास के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने का आह्वान किया। समारोह में चिकित्सकों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, अभिभावकों, स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। मंच पर केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, प्रेरक वक्ता सागर सिन्हा, फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. महिपाल सिंह, निदेशक एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, सीईओ डॉ. सुष्मिता भाटी, कृष्णा यादव, डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. सुधांशु सरकार, दीपक सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
करीब 40 सहायक उपकरणों का वितरण, आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह रहा जब केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा और अन्य अतिथियों ने जरूरतमंद दिव्यांगजनों को लगभग 40 सहायक उपकरण वितरित किए। इनमें 10 इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल, 10 सामान्य ट्राइसाइकिल और 20 व्हीलचेयर शामिल थीं। इन उपकरणों के माध्यम से लाभार्थियों को न केवल आवाजाही में सुविधा मिलेगी, बल्कि वे अपने दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे। केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार दिव्यांगजनों के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजनों का आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत तथा उच्च शिक्षा में 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।

डॉ. मुरली मनोहर जोशी बोले—‘प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं’
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘विकलांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द देकर समाज की सोच बदलने का कार्य किया था। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की शारीरिक सीमाएं उसकी प्रतिभा को सीमित नहीं कर सकतीं। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि उचित अवसर, शिक्षा और मार्गदर्शन मिले तो दिव्यांगजन भी समाज और राष्ट्र निर्माण में असाधारण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने सभी संस्थानों और समाज से दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को पहचानने तथा उन्हें समान अवसर प्रदान करने की अपील की।
बच्चों की प्रतिभा बनी समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण
समारोह में फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई स्किल डेवलपमेंट प्रदर्शनी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने हस्तशिल्प, रेजिन आर्ट, सेंसरी इंटीग्रेशन उपकरण, मिट्टी से बने कुल्हड़, गिलास, मटके और अन्य रचनात्मक उत्पादों का प्रदर्शन किया। अतिथियों ने बच्चों की मेहनत, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास की खुलकर सराहना की। संगीत, नृत्य, कविता और नाटक की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी भावनात्मक बना दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने यह साबित किया कि अवसर मिलने पर दिव्यांगजन किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
‘एक सम्मान मां के नाम’ पहल ने छुआ दिल
कार्यक्रम में ‘एक सम्मान मां के नाम’ पहल के अंतर्गत उन माताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने दिव्यांग बच्चों की परवरिश, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए संघर्ष करते हुए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने खड़े होकर माताओं का सम्मान किया।
‘होराइजन’ पत्रिका और ‘सेरेब्रल पाल्सी’ पुस्तक का विमोचन
समारोह में डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने फाउंडेशन की वार्षिक पत्रिका ‘होराइजन’ तथा ‘सेरेब्रल पाल्सी’ विषय पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के साहित्य से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी।

विशेषज्ञों और समाजसेवियों को भी मिला सम्मान
फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशेषज्ञों को ‘अवार्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया। प्रेरक वक्ता सागर सिन्हा ने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर असीम संभावनाएं होती हैं और सही मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी अपनी मंजिल हासिल कर सकता है। फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल चिकित्सा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को सम्मानजनक जीवन देना है। उन्होंने भविष्य में पुनर्वास सेवाओं को और अधिक व्यापक बनाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। समारोह ने यह संदेश दिया कि जब सरकार, सामाजिक संस्थाएं और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तब समावेशी और संवेदनशील भारत का सपना साकार होता है।

