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Tuesday, September 1, 2026
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    DM Raksha Bandhan Special News : DM मेधा रूपम ने बच्चों से की आत्मीय बातचीत, आर्या फैशन्स की पहल विशेष बच्चों ने डीएम मेधा रूपम को बांधी अपने हाथों से बनाई राखी, रक्षाबंधन पर कलेक्ट्रेट पहुंचकर बच्चों ने जताया अपनापन, DM ने बढ़ाया हौसला; आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रशिक्षण को बताया सराहनीय पहल

    कलेक्ट्रेट पहुंचने पर बच्चों ने जिलाधिकारी मेधा रूपम से मुलाकात की। बच्चों ने अपने हाथों से तैयार की गई राखियां उन्हें बांधीं। डीएम ने बच्चों से बेहद आत्मीयता के साथ बातचीत की और उनके द्वारा तैयार की गई राखियों को देखकर उनकी मेहनत और प्रतिभा की सराहना की। जिलाधिकारी ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें आगे भी इसी तरह अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया।

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर अभय किड्स फाउंडेशन के विशेष बच्चों ने अपने हुनर और आत्मीय भावनाओं से सभी का दिल जीत लिया। गुरुवार को फाउंडेशन के ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम एवं अन्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चे कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी मेधा रूपम को अपने हाथों से तैयार की गई राखी बांधी। बच्चों के इस स्नेहपूर्ण प्रयास से कलेक्ट्रेट परिसर का माहौल भावुक होने के साथ-साथ खुशनुमा भी हो गया। बच्चों ने रक्षाबंधन से पहले विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से स्वयं राखियां तैयार की थीं। इन राखियों में बच्चों की रचनात्मकता, मेहनत और आत्मविश्वास की झलक देखने को मिली। जब उन्होंने अपनी बनाई राखी डीएम मेधा रूपम की कलाई पर बांधी तो यह पल बच्चों के लिए बेहद खास बन गया।

    आर्या फैशन्स के सहयोग से मिल रहा हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण

    विशेष बच्चों को हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आर्या फैशन्स की संस्थापिका एवं महिला उद्यमी डॉ. खुशबू सिंह के सहयोग से अभय किड्स फाउंडेशन में हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना और उनके अंदर आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है। रक्षाबंधन के मद्देनजर बच्चों को राखी बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने विभिन्न रंगों, सजावटी सामग्रियों और डिजाइन का इस्तेमाल करते हुए आकर्षक राखियां तैयार कीं। बच्चों ने न केवल राखियां बनाईं, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मक क्षमता का भी प्रदर्शन किया।

    डीएम ने बच्चों से की आत्मीय बातचीत

    कलेक्ट्रेट पहुंचने पर बच्चों ने जिलाधिकारी मेधा रूपम से मुलाकात की। बच्चों ने अपने हाथों से तैयार की गई राखियां उन्हें बांधीं। डीएम ने बच्चों से बेहद आत्मीयता के साथ बातचीत की और उनके द्वारा तैयार की गई राखियों को देखकर उनकी मेहनत और प्रतिभा की सराहना की। जिलाधिकारी ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें आगे भी इसी तरह अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विशेष बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें उचित अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाए।

    डीएम ने बच्चों को हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण देने के लिए आर्या फैशन्स की पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    आत्मनिर्भर बनाना है मुख्य उद्देश्य: डॉ. खुशबू सिंह

    आर्या फैशन्स की संस्थापिका डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि विशेष बच्चों को केवल प्रशिक्षण देना ही इस पहल का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें उनकी क्षमता के अनुरूप हुनर प्रदान कर भविष्य में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। यदि उसे सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वह अपनी क्षमता को बेहतर तरीके से सामने ला सकता है। हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर बच्चों द्वारा अपने हाथों से राखियां बनाकर डीएम को बांटना उनके लिए गर्व का विषय है। बच्चों के चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी और उनके भीतर नजर आया आत्मविश्वास इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी विशेष बच्चों के लिए इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि उन्हें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिल सकें।

    प्रशिक्षण से बढ़ रहा बच्चों का आत्मविश्वास

    अभय किड्स फाउंडेशन की प्रधानाचार्या दिशा कपूर ने भी आर्या फैशन्स के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि विशेष बच्चों के लिए हैंडीक्राफ्ट जैसी गतिविधियां बेहद उपयोगी हैं। इससे बच्चों को अपनी रचनात्मक क्षमता का इस्तेमाल करने का अवसर मिलता है और उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपने हाथों से कोई वस्तु तैयार करते हैं और उसे समाज के सामने प्रस्तुत करते हैं, तो उनके भीतर उपलब्धि की भावना पैदा होती है। रक्षाबंधन पर बच्चों द्वारा तैयार राखियां इसी आत्मविश्वास और रचनात्मकता का उदाहरण हैं।

    स्नेह, सम्मान और आत्मविश्वास का संदेश

    रक्षाबंधन का यह आयोजन केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्नेह, सम्मान, समानता और समावेशी समाज का संदेश भी दिया। विशेष बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार की गई राखियों ने यह साबित किया कि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर वे भी अपनी प्रतिभा से समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।।डीएम मेधा रूपम को राखी बांधते समय बच्चों में दिखाई दिया उत्साह इस पहल की सफलता को बयां कर रहा था। वहीं, बच्चों की मेहनत और उनकी रचनात्मकता की सराहना से उनका उत्साह और बढ़ा।

    आर्या फैशन्स और अभय किड्स फाउंडेशन की यह पहल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कौशल विकास, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। रक्षाबंधन के इस अवसर पर बच्चों ने राखी के माध्यम से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ-साथ समाज में अपनत्व और समान अवसर का संदेश भी दिया।

    द न्यूज क्लिक की न्यूज

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