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Monday, June 1, 2026
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    “बिजली का झटका या जनता पर डबल अटैक?” 10% महंगी बिजली, ऊपर से ‘अफोर्डेबल चार्ज’ का नया बोझ; नोएडा के RWA अध्यक्ष ने उठाई आवाज, कहा— आम आदमी की जेब पर सीधा हमला, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर सबसे अधिक असर

    Electric shock or double attack on the public? 10% expensive electricity, new burden of 'affordable charge' from above; Noida's RWA president raises voice

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    नोएडा, द न्यूज क्लिक। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी होती दिखाई दे रही हैं। एक ओर पहले से बढ़ती महंगाई, घरेलू खर्चों और व्यापारिक लागतों का दबाव है, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग की नई नीतियों ने आम नागरिकों, मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों की चिंता को और बढ़ा दिया है। नोएडा के सेक्टर-105 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) ने बिजली विभाग के हालिया नियमों और प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इन्हें जनविरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता आज हर परिवार और व्यवसाय की जीवनरेखा बन चुकी है। ऐसे समय में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे लाखों परिवारों के मासिक बजट पर गंभीर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि नई नीतियों के कारण लोगों में असंतोष और चिंता दोनों बढ़ रही हैं।

    ‘अफोर्डेबल चार्ज’ के नाम पर बढ़ा आर्थिक बोझ

    आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने सबसे पहले बिजली विभाग द्वारा नए कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं पर लगाए जा रहे तथाकथित ‘अफोर्डेबल चार्ज’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नाम भले ही ‘अफोर्डेबल’ यानी किफायती रखा गया हो, लेकिन वास्तविकता में यह शुल्क आम नागरिकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो रहा है।
    उनका कहना है कि जो लोग नया घर बना रहे हैं, छोटे व्यापार शुरू कर रहे हैं या पहली बार बिजली कनेक्शन लेने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें इस नए शुल्क के कारण हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में यह नियम लोगों को राहत देने के बजाय परेशानी बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।
    दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि जब सरकार और विभाग डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी और बेहतर नागरिक सुविधाओं की बात करते हैं, तब बुनियादी सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाना जनता की उम्मीदों के विपरीत है। उनका मानना है कि यदि कोई शुल्क लगाया भी जाए तो वह पारदर्शी, तर्कसंगत और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।

    10 प्रतिशत बिजली दर वृद्धि से बढ़ी चिंता

    दूसरा बड़ा मुद्दा बिजली दरों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत तक की वृद्धि को लेकर है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष का कहना है कि पहले से ही खाद्य पदार्थों, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में बिजली की दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी सीधे तौर पर हर परिवार के मासिक खर्च को प्रभावित करेगी।
    उन्होंने कहा कि बिजली केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुकानों, छोटे उद्योगों, कार्यालयों और सेवा क्षेत्र की रीढ़ भी है। बिजली महंगी होने का असर उत्पादन लागत, व्यापारिक खर्च और अंततः उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। इसका प्रभाव व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है।

    मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर सबसे अधिक असर

    विशेषज्ञों का भी मानना है कि बिजली दरों में वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों पर पड़ता है। बड़े उद्योगों के पास लागत को समायोजित करने के विकल्प होते हैं, लेकिन सीमित आय वाले परिवारों के लिए हर अतिरिक्त बिल एक नई चुनौती बन जाता है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने कहा कि नोएडा जैसे तेजी से विकसित होते शहर में हजारों परिवार पहले ही हाउसिंग लोन, स्कूल फीस, मेडिकल खर्च और अन्य आवश्यकताओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में बिजली का बढ़ा हुआ बिल उनके घरेलू बजट को और अधिक असंतुलित कर सकता है।

    “बिजली सुविधा है, बोझ नहीं बननी चाहिए”

    दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश का नागरिक बिजली जैसी बुनियादी सेवा के लिए भी स्वयं को आर्थिक दबाव में महसूस कर रहा है। सरकार और विभाग का उद्देश्य जनता को सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि उन पर अतिरिक्त बोझ डालना। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उपभोक्ताओं की भावनाओं और जरूरतों को समझते हुए ऐसे फैसले लेगी, जो विकास और जनहित दोनों के बीच संतुलन बनाए रखें।

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