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Wednesday, October 21, 2026
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    YEIDA Authority News : फलैदा गौशाला का होगा कायाकल्प, 600 निराश्रित गोवंश के लिए तैयार हुई बेहतर व्यवस्था, यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने किया नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण, परिसर में लगाए गए करीब 5 हजार पौधे, CCTV से होगी गोवंश की निगरानी, गोबर और गौमूत्र से तैयार होंगे उपयोगी उत्पाद

    निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष मीणा, राजेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार भाटिया, विशेष कार्याधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह एवं महराम सिंह, महाप्रबंधक (परियोजना) राजेन्द्र भाटी, उप निदेशक (उद्यान) आनन्द मोहन सिंह सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामवासी भी उपस्थित रहे।

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की ओर से फलैदा बांगर स्थित गौशाला को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने गौशाला के नवीनीकरण एवं विकास कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद सीईओ ने गौशाला परिसर में वृक्षारोपण भी किया।

    7.978 हेक्टेयर में विकसित की जा रही गौशाला

    प्राधिकरण के अनुसार फलैदा बांगर गौशाला का कुल क्षेत्रफल करीब 7.978 हेक्टेयर है। गौशाला परिसर में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए करीब 5,000 पौधे लगाए गए हैं। इसके साथ ही लगभग दो एकड़ क्षेत्र में लॉन विकसित किया गया है। यहां निराश्रित गोवंश के लिए पर्याप्त स्थान और बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। प्राधिकरण के मुताबिक गौशाला में वर्तमान समय में 146 नंदी और 488 गाय, यानी कुल 634 गोवंश मौजूद हैं। वहीं परिसर में करीब 600 निराश्रित गोवंश के रहने की व्यवस्था विकसित की गई है।

    सीसीटीवी और प्रकाश व्यवस्था से बढ़ेगी निगरानी

    गोवंश की सुरक्षा और उनकी गतिविधियों की निगरानी के लिए गौशाला परिसर में छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा परिसर में चार हाईमास्ट लाइट और 40 स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की गई है, जिससे रात के समय भी परिसर में पर्याप्त रोशनी और निगरानी सुनिश्चित की जा सके। गोवंश को मौसम की परिस्थितियों से बचाने के लिए गौशाला में 12+113 शेड बनाए गए हैं। इसके अलावा चारे के भंडारण के लिए चार भूसा घर भी तैयार किए गए हैं। पानी की जरूरतों और वर्षा जल संचयन को ध्यान में रखते हुए परिसर में दो तालाब बनाए गए हैं।

    गोबर और गौमूत्र से तैयार होंगे उपयोगी उत्पाद

    फलैदा गौशाला को केवल गोवंश के आश्रय स्थल तक सीमित न रखते हुए यहां गोबर एवं गौमूत्र के उपयोग की दिशा में भी पहल की गई है। प्राधिकरण के अनुसार गौशाला में गोबर प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया गया है। इसके अलावा गोबर, खाद और गौमूत्र के उपयोग से अगरबत्ती और धूपबत्ती तैयार करने के लिए आवश्यक उपकरण भी स्थापित किए गए हैं। इस पहल से गोबर और अन्य जैविक सामग्री के बेहतर उपयोग के साथ गौशाला परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं वर्षा जल संचयन के लिए बनाए गए तालाब जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    गोवंश की देखभाल के लिए 29 कर्मचारी तैनात

    गौशाला में गोवंश की देखभाल के लिए एक पशु चिकित्सक और एक सहायक के साथ कुल 29 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। गर्मी के मौसम को देखते हुए परिसर में 67 पंखों की व्यवस्था भी की गई है, ताकि गोवंश को पर्याप्त सुविधा मिल सके। सीईओ राकेश कुमार सिंह ने निरीक्षण के दौरान गौशाला में उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों से नवीनीकरण कार्य की प्रगति एवं गोवंश की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के बाद उन्होंने परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

    अधिकारी और ग्रामीण रहे मौजूद

    निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष मीणा, राजेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार भाटिया, विशेष कार्याधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह एवं महराम सिंह, महाप्रबंधक (परियोजना) राजेन्द्र भाटी, उप निदेशक (उद्यान) आनन्द मोहन सिंह सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामवासी भी उपस्थित रहे।

    द न्यूज क्लिक की न्यूज

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