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Monday, August 24, 2026
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    Sharda University में आधुनिक बायोइन्फॉर्मेटिक्स पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू, AI और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी की नई तकनीकों पर मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

    Five-day faculty development program on modern bioinformatics started at Sharda University, practical training will be provided on new techniques of AI and computational biology

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। शारदा यूनिवर्सिटी में आधुनिक बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी के क्षेत्र में शिक्षकों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को नवीनतम तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का शुभारंभ किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को जीवन विज्ञान के तेजी से बदलते परिदृश्य, आधुनिक शोध पद्धतियों और अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों से अवगत कराना है। कार्यक्रम के दौरान देश के विशेषज्ञ वैज्ञानिक और शिक्षाविद प्रतिभागियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करेंगे, बल्कि आधुनिक शोध उपकरणों और सॉफ्टवेयर पर हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी देंगे। इससे प्रतिभागी इन तकनीकों का उपयोग अपने शोध, अध्यापन और नवाचार कार्यों में अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।

    डीएनए से लेकर एआई आधारित ड्रग डिस्कवरी तक मिलेगा प्रशिक्षण

    इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को डीएनए एवं प्रोटीन सीक्वेंस विश्लेषण, प्रोटीन स्ट्रक्चर मॉडलिंग, मॉलेक्यूलर डॉकिंग, कंप्यूटर आधारित दवा खोज (Computer-Aided Drug Discovery), ओमिक्स टेक्नोलॉजी, सिस्टम्स बायोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा मशीन लर्निंग (ML) जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ प्रतिभागियों को बताएंगे कि किस प्रकार आधुनिक कम्प्यूटेशनल तकनीकों की सहायता से जीवन विज्ञान के जटिल शोध कार्यों को अधिक तेज, सटीक और प्रभावी बनाया जा सकता है।

    नई तकनीकों से जुड़ना समय की आवश्यकता : प्रो. (डॉ.) सिबाराम खारा

    शारदा यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) सिबाराम खारा ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के साथ शिक्षकों और शोधार्थियों का अद्यतन रहना अत्यंत आवश्यक है।

    उन्होंने कहा “आज विज्ञान के क्षेत्र में नई तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों को नई जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करते हैं। हमें विश्वास है कि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के ज्ञान, कौशल और शोध क्षमता को नई दिशा देगा तथा उन्हें भविष्य के बेहतर अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगा।”

    बायोइन्फॉर्मेटिक्स ने बदल दिया है शोध का स्वरूप : प्रो. डॉ. भुवनेश कुमार

    डीन रिसर्च प्रो. डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि बायोइन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी ने जीवन विज्ञान के शोध का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा”इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक सॉफ्टवेयर, शोध उपकरणों और तकनीकों पर कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे वे अपने शोध एवं शिक्षण कार्य में इन नवीनतम तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर सकेंगे। यह कार्यक्रम सीखने, विचारों के आदान-प्रदान और नए अनुसंधान सहयोग विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।”

    शोध और नवाचार को मिलेगा नया आयाम

    विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों को वैश्विक वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आधुनिक तकनीकों का ज्ञान उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नवाचार आधारित परियोजनाओं में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा।

    यह पांच दिवसीय कार्यक्रम प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव, आधुनिक शोध उपकरणों की समझ और भविष्य के वैज्ञानिक सहयोग के नए अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, यह पहल शारदा यूनिवर्सिटी की अनुसंधान एवं नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

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