ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। समाज सेवा केवल जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह उन लोगों के जीवन में भी नई उम्मीद जगाने का माध्यम बनती है, जो परिस्थितियोंवश समाज की मुख्यधारा से दूर हो जाते हैं। इसी मानवीय सोच और सेवा भावना का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इनर व्हील क्लब ऑफ नवीन ग्रेटर नोएडा, डिस्ट्रिक्ट-301 ने लुक्सर स्थित जिला कारागार में एक अनूठा सामाजिक सेवा अभियान आयोजित किया। इस दौरान महिला बंदियों के स्वास्थ्य, पोषण और आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए एक दुग्ध देने वाली गाय का गौदान किया गया। इसके साथ ही महिला बंदियों के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के लिए चार पंखे भी भेंट किए गए, जिससे वहां प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को बेहतर वातावरण मिल सके।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज के उस वर्ग के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संदेश था, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कार्यक्रम में क्लब के पदाधिकारियों, जेल प्रशासन और विभिन्न सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने इसे और भी गरिमामय बना दिया।
महिला बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का प्रयास
कार्यक्रम के दौरान क्लब की अध्यक्ष अंकिता सिंह ने अपने करकमलों से गौदान करते हुए कहा कि समाज सेवा का वास्तविक अर्थ तभी पूर्ण होता है, जब हम उन लोगों तक भी सहायता पहुंचाएं, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जेल में बंद महिलाएं भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें भी सम्मान, सहयोग तथा बेहतर जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि हम किसी के जीवन में आशा की एक नई किरण जगा सकें, तो इससे बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता। महिला बंदियों के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए यह गौदान किया गया है, ताकि उन्हें शुद्ध दूध उपलब्ध हो सके और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए।”

गौदान को बताया भारतीय संस्कृति और सेवा का प्रतीक
कार्यक्रम में क्लब की एनिमल वेलफेयर चेयरपर्सन माला ऋषि ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौसेवा और गौदान का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि गाय केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि ऐसे सेवा कार्य समाज में करुणा, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं। इनर व्हील क्लब भविष्य में भी समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के लिए इसी प्रकार के सेवा कार्य करता रहेगा।
सिलाई प्रशिक्षण केंद्र को मिले चार पंखे, आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल
कार्यक्रम के दौरान समाजसेविका अंजू गर्ग ने महिला बंदियों के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के लिए चार पंखे भेंट किए। बताया गया कि जेल में कई महिला बंदियां सिलाई और अन्य कौशल आधारित प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें। सिलाई केंद्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से महिलाओं को प्रशिक्षण लेने में सुविधा मिलेगी और उनका मनोबल भी बढ़ेगा। उपस्थित लोगों ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
जेल प्रशासन ने की क्लब की सराहना
कार्यक्रम में जिला कारागार गौतमबुद्ध नगर के जेल अधीक्षक बृजेश कुमार, जेलर संजय साहि, डॉ. रोहित (डायरेक्टर, एमआईटी, मुरादाबाद) तथा रोहित निगम विशेष रूप से उपस्थित रहे। जेल प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे सामाजिक कार्यक्रम महिला बंदियों के मानसिक और सामाजिक पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज के विभिन्न संगठनों को आगे आकर इस प्रकार की पहल करनी चाहिए, जिससे बंदियों को यह महसूस हो कि समाज उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार है।
क्लब के सदस्यों ने निभाई सक्रिय भूमिका
इस सेवा अभियान को सफल बनाने में क्लब के अनेक पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय योगदान दिया। प्रोजेक्ट चेयरमैन उमा गोयल एवं संतोष गुप्ता ने भी गौदान में सहभागिता निभाई तथा गाय के लिए चारे की व्यवस्था कर सेवा कार्य को और अधिक सार्थक बनाया। कार्यक्रम में आईएसओ प्रतिभा सिसोदिया, पूर्व अध्यक्ष अनीता सिंघला, एडवाइजर करुणा भल्ला, सोनिका, दीपा, डॉ. ईहा, अनीता साही तथा क्लब की सचिव शैली गर्ग सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।
सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
समारोह के अंत में सभी अतिथियों ने क्लब अध्यक्ष अंकिता सिंह और सचिव शैली गर्ग को इस संवेदनशील एवं प्रेरणादायी आयोजन के लिए बधाई दी। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में ऐसे सेवा कार्य समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम करते हैं। यदि सामाजिक संगठन इसी प्रकार आगे बढ़कर जरूरतमंद लोगों की मदद करें, तो समाज अधिक संवेदनशील, समरस और मानवीय बन सकता है।
इनर व्हील क्लब ऑफ नवीन ग्रेटर नोएडा द्वारा लुक्सर जेल में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का संदेश देता है कि सेवा का दायरा सीमाओं से परे होता है। समाज का प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और अवसर का अधिकारी है तथा सामूहिक प्रयासों से ही एक बेहतर और संवेदनशील समाज का निर्माण संभव है।

