ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जहां एक ओर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण लगभग 35,000 से 40,000 वर्ग मीटर भूमि को नई कमर्शियल स्कीम के लिए चिन्हित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर और आसपास के लाखों नागरिकों का कहना है कि इस समय सबसे बड़ी जरूरत व्यावसायिक परियोजनाओं की नहीं, बल्कि प्राधिकरण द्वारा निर्मित आधुनिक सरकारी अस्पतालों की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक वर्ष के दौरान प्राधिकरण ने केवल निजी अस्पतालों को प्लॉट आवंटित करने के लिए योजनाएं निकाली हैं, जबकि सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती। इसका सीधा असर आम नागरिकों, मजदूरों, किसानों, नौकरीपेशा लोगों और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है, जिन्हें निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
एक्टिव सिटीजन के आलोक सिंह का कहना है कि गौतमबुद्ध नगर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है। जिले में लगभग 95 प्रतिशत निजी अस्पताल हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों की हिस्सेदारी केवल 5 प्रतिशत के आसपास है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार कर इस असंतुलन को दूर किया जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक को सुलभ और किफायती उपचार मिल सके।
एक्टिव सिटीजन के मनजीत सिंह का कहना है कि विशेष रूप से ग्रेटर नोएडा वेस्ट, जिसकी आबादी लगभग 8 लाख तक पहुंच चुकी है, वहां आज भी बड़े सरकारी अस्पताल का अभाव महसूस किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि इस क्षेत्र में 500-500 बेड क्षमता वाले दो आधुनिक प्राधिकरण निर्मित सरकारी अस्पताल प्राथमिकता के आधार पर स्थापित किए जाएं। इससे लाखों लोगों को बेहतर और सस्ती चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी तथा निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी कम होगी।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी क्षेत्रवार 100-100 बेड वाले कम से कम पांच सरकारी अस्पताल स्थापित किए जाने की मांग उठाई गई है। इससे गांवों के लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं भी बेहतर हो सकेंगी।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि विकास केवल व्यावसायिक परियोजनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से होता है। इसलिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को नई कमर्शियल स्कीमों के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि तेजी से बढ़ती आबादी को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

