ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा को देश के सबसे स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहरों की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने बड़ा फैसला लिया है। तेजी से बढ़ती आबादी, नए सेक्टरों के विस्तार और शहरीकरण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए अब शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह नए ढांचे में विकसित किया जाएगा। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रवि कुमार एनजी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत 3,000 नए सफाई कर्मियों की भर्ती की जाएगी। इसके बाद शहर में सफाई कर्मचारियों की कुल संख्या 2,100 से बढ़कर 5,100 हो जाएगी।

यह निर्णय केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर में आधुनिक, जवाबदेह और तकनीक आधारित सफाई व्यवस्था लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण का लक्ष्य है कि शहर का हर सेक्टर, हर सोसायटी, हर बाजार और हर गांव नियमित रूप से साफ-सुथरा रहे और नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता मिल सके।
बढ़ती आबादी के अनुरूप तैयार होगी नई सफाई व्यवस्था
पिछले कुछ वर्षों में ग्रेटर नोएडा का तेजी से विस्तार हुआ है। नए आवासीय सेक्टर, हाईराइज सोसायटियां, औद्योगिक इकाइयां, शैक्षणिक संस्थान और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इसके कारण शहर की आबादी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे कूड़ा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में उपलब्ध 2,100 सफाई कर्मियों के लिए पूरे शहर में प्रभावी सफाई व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई नए विकसित क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में कर्मचारियों की कमी के कारण नियमित सफाई प्रभावित होती है। इसी स्थिति को देखते हुए 3,000 अतिरिक्त सफाई कर्मियों की भर्ती का निर्णय लिया गया है।
हर सेक्टर और गांव तक पहुंचेगी नियमित सफाई
नई भर्ती के बाद सफाई व्यवस्था को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाएगा कि शहर के किसी भी हिस्से में सफाई कार्य प्रभावित न हो। अभी कई स्थानों पर विशेष परिस्थितियों में क्विक रिस्पांस टीम (QRT) के माध्यम से सफाई कराई जाती है, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक क्षेत्र के लिए पर्याप्त संख्या में नियमित सफाई कर्मचारी उपलब्ध रहेंगे।
इससे समय पर कूड़ा उठान, नालियों की सफाई, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, पार्कों का रखरखाव और सड़कों की सफाई अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। साथ ही नागरिकों की शिकायतों का भी तेजी से समाधान संभव होगा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट और ईस्ट में अलग-अलग होगी सफाई व्यवस्था
प्राधिकरण शहर की सफाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा वेस्ट और ग्रेटर नोएडा ईस्ट को दो अलग-अलग सफाई जोनों में विभाजित करने की योजना पर कार्य कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें और अन्य आधुनिक सफाई सेवाएं इसी मॉडल पर संचालित की जा रही हैं। अब नए सफाई कर्मियों की तैनाती भी दोनों जोनों की आबादी, क्षेत्रफल और आवश्यकताओं के अनुसार की जाएगी।
इस व्यवस्था से प्रत्येक जोन की अलग निगरानी होगी, अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और सफाई कार्यों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी
प्राधिकरण सफाई व्यवस्था को केवल मानव संसाधन तक सीमित नहीं रखना चाहता। आने वाले समय में आधुनिक मशीनों, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, उन्नत कूड़ा प्रबंधन प्रणाली और डिजिटल मॉनिटरिंग को भी मजबूत किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुख्य सड़कें, बाजार, पार्क, सार्वजनिक स्थल, आवासीय सेक्टर और ग्रामीण क्षेत्र सभी समान रूप से स्वच्छ रहें। तकनीक आधारित निगरानी से सफाई कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी।
सीईओ रवि कुमार एनजी का विजन—स्वच्छ और स्मार्ट ग्रेटर नोएडा
सीईओ रवि कुमार एनजी लगातार शहर की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रहे हैं। सफाई व्यवस्था को मजबूत करने का यह निर्णय भी उसी व्यापक विजन का हिस्सा माना जा रहा है।
प्राधिकरण का उद्देश्य केवल कूड़ा हटाना नहीं, बल्कि स्वच्छता को नागरिकों की जीवनशैली का हिस्सा बनाना है। बेहतर सफाई व्यवस्था से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आएगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शहर की सुंदरता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
नागरिकों की भागीदारी भी होगी अहम
प्राधिकरण ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि वे गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखें, कूड़ा निर्धारित स्थानों पर ही डालें तथा सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी फैलाने से बचें।
अधिकारियों का मानना है कि प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही ग्रेटर नोएडा को वास्तव में स्वच्छ और आदर्श शहर बनाया जा सकता है।
स्वच्छता की दिशा में बड़ा बदलाव
3,000 नए सफाई कर्मियों की भर्ती, 5,100 कर्मचारियों की मजबूत टीम, दो जोन आधारित सफाई व्यवस्था, आधुनिक मशीनों का उपयोग और तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली ग्रेटर नोएडा को स्वच्छता के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है। यदि यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में शहर की सफाई व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा और नागरिकों को पहले से कहीं अधिक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

