ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा के निजी अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने एक परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। दनकौर क्षेत्र के नवादा गांव निवासी ओमवीर नागर के पैर में सड़क दुर्घटना के बाद हुआ एक सामान्य फ्रैक्चर इलाज के दौरान कथित रूप से इतनी गंभीर स्थिति में पहुंच गया कि आखिरकार डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनका पैर काटना पड़ा। अब इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। वहीं करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता की मांग की है।
सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचे, लेकिन आरोप है कि इलाज ने बढ़ा दी परेशानी
जानकारी के अनुसार दनकौर के नवादा गांव निवासी ओमवीर नागर सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे, जिसमें उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। इसके बाद उनका उपचार ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ हॉस्पिटल में कराया गया। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान उचित चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिलने के कारण उनके पैर में गंभीर संक्रमण फैल गया।
परिवार का कहना है कि अस्पताल में कई बार भर्ती कराने, लगातार उपचार कराने और लगभग 9 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उल्टा संक्रमण लगातार बढ़ता गया और अंततः चिकित्सकों ने उनकी जान बचाने के लिए उनका पैर काटने का निर्णय लिया। इस घटना के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
परिवार पर टूटा आर्थिक और मानसिक संकट
पीड़ित परिवार का कहना है कि पैर कटने के बाद ओमवीर नागर अब स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। इससे उनका रोजगार प्रभावित हो गया है और परिवार की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। परिवार का कहना है कि इलाज में जमा पूंजी खर्च हो चुकी है और अब बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च तथा भविष्य की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिजनों के अनुसार यदि उपचार में लापरवाही नहीं हुई होती तो शायद आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इसी कारण वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के नाम भेजा गया ज्ञापन
इस मामले को लेकर करप्शन फ्री इंडिया संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन भेजा है। उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की समयबद्ध, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सीय लापरवाही, नियमों की अनदेखी या अन्य अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अस्पताल और जिम्मेदार चिकित्सकों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवार को मुआवजा और सरकारी सहायता देने की मांग
ज्ञापन में केवल कार्रवाई की ही मांग नहीं की गई, बल्कि पीड़ित परिवार को राहत देने की भी अपील की गई है। संगठन ने मांग की है कि ओमवीर नागर को उचित आर्थिक मुआवजा, सरकारी सहायता, दिव्यांगजन योजनाओं का लाभ तथा आजीविका के लिए विशेष सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनका परिवार सामान्य जीवन जी सके। संगठन का कहना है कि किसी भी मरीज के साथ यदि चिकित्सीय लापरवाही हुई है तो उसे न्याय मिलना चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
न्याय नहीं मिला तो अस्पताल के बाहर होगा आंदोलन
करप्शन फ्री इंडिया संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने कहा कि यदि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय नहीं मिला और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से यथार्थ हॉस्पिटल के मुख्य द्वार पर आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाना और स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
यह मामला अब प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के संज्ञान में पहुंच चुका है। हालांकि चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पक्षों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठन मुख्यमंत्री से न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जताया समर्थन
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। इनमें बलराज हूंण, ब्रह्मपाल कपासिया, गौरव भाटी, जितेंद्र कुमार, धर्मेंद्र भाटी, रोहतास नागर, रिंकू बैंसला, दुलीचंद नागर, विजेंद्र नागर, बालेश्वर नागर, सुरेंद्र कुमार सहित अन्य लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी मरीज के साथ वास्तव में चिकित्सीय लापरवाही हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।

