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Monday, June 1, 2026
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    झाड़ू-पोंछा करने वाली मां की बेटी ने रचा इतिहास! मोरना की ममता ने हॉकी मैदान में लहराया यूपी का परचम, संघर्ष की कहानी सुन हर आंख हुई नम

    The daughter of a mother who sweeps and sweeps made history! Morna's Mamata waved the flag of UP in the hockey field, every eye got wet after hearing the story of struggle

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक।
    कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो गरीबी भी सपनों की उड़ान नहीं रोक सकती। ग्रेटर नोएडा के मोरना सेक्टर-35 की रहने वाली एक साधारण परिवार की बेटी ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। आर्थिक तंगी, संघर्ष और अभावों के बीच पली-बढ़ी ममता कुमारी ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। ममता ने 16वीं सब जूनियर राष्ट्रीय महिला हॉकी चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व कर पूरे गौतम बुद्ध नगर और प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि टीम खिताब से थोड़ी दूर रह गई, लेकिन ममता की कहानी ने हजारों लोगों के दिल जीत लिए। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, मां की मेहनत और सपनों की जीत की कहानी बन गई है।

    पिता का साया नहीं, मां ने मेहनत से बेटी का सपना जिंदा रखा

    ममता कुमारी का जीवन आसान नहीं रहा। बेहद निम्नवर्गीय परिवार से आने वाली ममता के सिर से बचपन में ही पिता का साया उठ गया था। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। लेकिन ममता की मां ने हार नहीं मानी। वह घर-घर जाकर झाड़ू-पोंछा और घरेलू काम करके अपनी बेटी के सपनों को जिंदा रखती रहीं। दिनभर मेहनत करने के बाद भी उन्होंने कभी ममता को कमजोर नहीं पड़ने दिया। मां की इसी मेहनत और त्याग ने ममता को वह ताकत दी, जिसने उसे राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप तक पहुंचा दिया।

    मोरना की गलियों से राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप तक का सफर

    ममता की प्रतिभा बचपन से ही खेलों की तरफ दिखाई देने लगी थी। मोहल्ले की गलियों में खेलने वाली यह लड़की धीरे-धीरे हॉकी के मैदान तक पहुंची। शुरुआत में संसाधनों की कमी थी, लेकिन जुनून की कोई कमी नहीं थी।
    इसी दौरान गौतम बुद्ध नगर हॉकी संघ की नजर ममता पर पड़ी। संघ ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और उसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नियमित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सहयोग ने ममता के खेल को नई दिशा दी।

    कोच दिलीप कुमार ने पहचानी प्रतिभा, मेहनत से बनाया स्टार खिलाड़ी

    हर सफल खिलाड़ी के पीछे एक कोच की मेहनत भी छिपी होती है। ममता की सफलता के पीछे उनके शुरुआती हॉकी प्रशिक्षक दिलीप कुमार का भी बड़ा योगदान माना जा रहा है।
    उन्होंने ममता की प्रतिभा को समय रहते पहचान लिया और उसे सही दिशा दी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने ममता को तकनीकी प्रशिक्षण दिया, उसकी फिटनेस पर काम किया और मानसिक रूप से मजबूत बनाया।

    राष्ट्रीय मंच पर यूपी का प्रतिनिधित्व, जिले में खुशी की लहर

    रांची में आयोजित 16वीं सब जूनियर राष्ट्रीय महिला हॉकी चैंपियनशिप में ममता ने उत्तर प्रदेश की टीम का हिस्सा बनकर शानदार खेल का प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश टीम ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार मुकाबले खेले और चौथे स्थान तक पहुंची।
    जैसे ही ममता की उपलब्धि की खबर ग्रेटर नोएडा पहुंची, क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे जिले की बेटियों के लिए प्रेरणादायक क्षण बताया।

    हॉकी संघ ने किया सम्मानित, मां और कोच को भी मिला सम्मान

    ममता की इस उपलब्धि पर गौतम बुद्ध नगर हॉकी संघ ने विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया। संघ के महासचिव सरदार मंजीत सिंह और उपाध्यक्ष हरेंद्र भाटी ने ममता, उनकी माता और प्रशिक्षक दिलीप कुमार को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

    बेटियों के सपनों को उड़ान देने की जरूरत

    ममता की कहानी केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाली कहानी है। यह बताती है कि यदि बेटियों को सही अवसर और सहयोग मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

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