नई दिल्ली, द न्यूज क्लिक। सामुदायिक स्वास्थ्य और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी ने लक्ष्मी तरु फाउंडेशन के साथ हेल्थकेयर पार्टनर के रूप में देश के सबसे बड़े स्वैच्छिक रक्तदान अभियानों में से एक का सफल आयोजन किया। नई दिल्ली के रोहिणी में आयोजित इस मेगा अभियान में करीब 10,000 लोगों ने भाग लिया, जबकि 3,100 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। यह आयोजन देश की सबसे बड़ी सामुदायिक रक्तदान पहलों में शामिल हो गया।
रक्तदान से बचाई जा सकती हैं कई जिंदगियां
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्तदान किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला सबसे बड़ा जीवनदान है। दान किए गए रक्त की एक यूनिट कई मरीजों के उपचार में उपयोगी होती है। दुर्घटनाओं, आपातकालीन चिकित्सा, बड़ी सर्जरी, प्रसव, अंग प्रत्यारोपण, कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकती है।

स्वैच्छिक रक्तदाता ही स्वास्थ्य व्यवस्था की असली ताकत
शारदाकेयर हेल्थसिटी के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एवं ब्लड बैंक विभाग के प्रमुख डॉ. हरप्रीत सिंह ने कहा कि प्रत्येक यूनिट रक्त कई लोगों की जान बचाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा, “रक्त का कृत्रिम निर्माण संभव नहीं है। इसलिए स्वैच्छिक रक्तदाता ही किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी होते हैं। इस तरह के बड़े अभियान अस्पतालों को आपातकालीन परिस्थितियों और जीवनरक्षक रक्त आधान (ट्रांसफ्यूजन) के लिए हमेशा तैयार रखते हैं।”
रक्तदान से दानकर्ता को भी मिलते हैं स्वास्थ्य लाभ
विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित अंतराल पर योग्य व्यक्तियों द्वारा रक्तदान करने से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है, नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण बेहतर होता है तथा समग्र स्वास्थ्य में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है। साथ ही यह जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदान का कार्य करता है।
ब्लड कैंसर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण
शारदाकेयर हेल्थसिटी में हीमैटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. पवन कुमार सिंह ने कहा कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट और रक्त संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को उपचार के दौरान बार-बार रक्त और प्लेटलेट्स की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने कहा, “नियमित स्वैच्छिक रक्तदान से रक्त की सतत उपलब्धता बनी रहती है, जिससे मरीजों के उपचार के बेहतर परिणाम सामने आते हैं और उनके परिवारों को नई उम्मीद मिलती है।”
ग्रुप डॉ कौसर शाह CEO ने बताया सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण
शारदाकेयर हेल्थसिटी एवं शारदा हॉस्पिटल के ग्रुप CEO डॉ. कौसर शाह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाना भी स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “यह अभियान सामूहिक सहयोग, सेवा भावना और मानव जीवन बचाने की हमारी साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। लक्ष्मी तरु फाउंडेशन ने जिस समर्पण के साथ इस विशाल अभियान का नेतृत्व किया है, वह सराहनीय है।”

हर रक्तदाता को मिला ISI मार्क हेलमेट
इस अभियान की विशेष बात यह रही कि शारदाकेयर हेल्थसिटी ने प्रत्येक स्वैच्छिक रक्तदाता को ISI-मार्क वाला हेलमेट निःशुल्क भेंट किया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना था कि रक्तदान जीवन बचाता है और हेलमेट जीवन की सुरक्षा करता है। इससे अस्पताल की प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और सड़क सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता भी स्पष्ट हुई।
250 से अधिक संस्थाओं ने किया सहयोग
इस विशाल रक्तदान अभियान में Thalassemics India, Rotary Club, Lions Club, DATRI Foundation सहित लगभग 250 गैर-सरकारी संगठनों एवं सामाजिक संस्थाओं ने सक्रिय सहयोग किया। अभियान को मिली व्यापक जनभागीदारी ने समाज में बढ़ती सामाजिक जिम्मेदारी और मानव सेवा की भावना को भी दर्शाया। उत्तर भारत के प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में शामिल है शारदाकेयर हेल्थसिटी
शारदाकेयर हेल्थसिटी, ग्रेटर नोएडा स्थित 600 से अधिक बेड वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है। अस्पताल 30 से अधिक चिकित्सा विशेषज्ञताओं में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। यहां उत्तर भारत के सबसे बड़े बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटरों में से एक संचालित है तथा SingHealth (सिंगापुर) के सहयोग से विकसित क्षेत्र का सबसे बड़ा लेवल-1 इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर सेंटर भी स्थापित है।

