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Tuesday, July 21, 2026
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    GIMS News : सरकारी मेडिकल संस्थान से राष्ट्रीय इनोवेशन हब तक का सफर! CII Healthcare Summit 2026 में GIMS का दमदार प्रदर्शन, दो हेल्थ स्टार्टअप्स ने बिखेरा नवाचार का जलवा

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    ग्रेटर नोएडा/नई दिल्ली, द न्यूज क्लिक। देश में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक और नवाचार से जोड़ने की दिशा में गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। सीआईआई हेल्थकेयर समिट 2026 में जीआईएमएस ने न केवल अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सरकारी चिकित्सा संस्थान अब केवल इलाज और चिकित्सा शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार, रिसर्च और स्टार्टअप इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। समिट में जीआईएमएस के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) द्वारा इनक्यूबेट किए गए दो हेल्थकेयर स्टार्टअप्स मैट्री (Matri) और बीवेल (BeWell) ने अपने अत्याधुनिक स्वास्थ्य समाधान प्रस्तुत कर विशेषज्ञों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

    राष्ट्रीय मंच पर चमका जीआईएमएस का इनोवेशन मॉडल

    देश के प्रतिष्ठित उद्योग संगठन कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) द्वारा आयोजित हेल्थकेयर समिट 2026 में देशभर के प्रमुख सरकारी एवं निजी अस्पतालों, हेल्थकेयर कंपनियों, स्टार्टअप्स, निवेशकों, चिकित्सकों और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर जीआईएमएस का प्रतिनिधित्व केवल संस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के लिए भी गौरव का विषय रहा। समिट के दौरान जीआईएमएस के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) के कार्यों की विशेष सराहना की गई। विशेषज्ञों ने माना कि जीआईएमएस ने चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार, क्लिनिकल वैलिडेशन, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और उद्योग सहयोग को जोड़ते हुए एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसे देश के अन्य सरकारी मेडिकल संस्थान भी अपनाने का प्रयास कर सकते हैं।

    ‘डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज़’ सत्र में स्टार्टअप्स ने पेश किए अभिनव समाधान

    समिट के सबसे चर्चित सत्र “डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज़” में जीआईएमएस के दो स्टार्टअप मैट्री (Matri) और बीवेल (BeWell) ने अपने हेल्थकेयर इनोवेशन का प्रस्तुतीकरण किया। दोनों स्टार्टअप्स ने ऐसी तकनीकों और समाधानों को प्रस्तुत किया, जिनका उद्देश्य मरीजों तक बेहतर, तेज़ और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इन प्रस्तुतियों को निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने गंभीरता से सुना और नवाचारों की उपयोगिता पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। विशेषज्ञों का मानना था कि इस प्रकार के स्टार्टअप्स भविष्य में भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ, किफायती और तकनीक आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    डॉ. राहुल सिंह को मिला राष्ट्रीय सम्मान

    समिट के दौरान सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राहुल सिंह को “डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज़” सत्र की अध्यक्षता (Session Chair) करने के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में उभरती तकनीकों, मेडिकल इनोवेशन, स्टार्टअप संस्कृति और भविष्य की चुनौतियों पर विशेषज्ञों के बीच सार्थक चर्चा का संचालन किया।

    डॉ. राहुल सिंह की भूमिका ने यह स्पष्ट किया कि जीआईएमएस अब केवल एक सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं, बल्कि देश में मेडिकल इनोवेशन का एक उभरता हुआ केंद्र बन चुका है।

    सरकारी संस्थान भी बन सकते हैं इनोवेशन के केंद्र

    समिट में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि जीआईएमएस ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दृष्टिकोण, नेतृत्व और सहयोग मिले तो सरकारी संस्थान भी विश्वस्तरीय नवाचार इकोसिस्टम विकसित कर सकते हैं। जीआईएमएस ने स्टार्टअप्स को क्लिनिकल परीक्षण, अनुसंधान सहयोग, उद्योग से जुड़ाव, नियामकीय सहायता और निवेशकों तक पहुंच उपलब्ध कराकर एक मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया है। यह मॉडल स्वास्थ्य क्षेत्र में नए उद्यमियों और शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है।

    मरीजों तक पहुंचेगा नवाचार का सीधा लाभ

    जीआईएमएस का मानना है कि किसी भी मेडिकल इनोवेशन की वास्तविक सफलता तभी है, जब उसका लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचे। इसी सोच के साथ सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन लगातार ऐसे स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित कर रहा है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और आधुनिक बना सकें।

    संस्थान का उद्देश्य डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाकर ऐसे समाधान विकसित करना है, जो भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर सकें।

    डॉ. राहुल सिंह ने कही यह महत्वपूर्ण बात

    इस अवसर पर डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जीआईएमएस के नवाचार मॉडल को मिली पहचान संस्थान के लिए अत्यंत गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां चिकित्सक, शोधकर्ता और स्टार्टअप्स मिलकर ऐसे नवाचार विकसित करें, जो सीधे मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जीआईएमएस मेडिकल टेक्नोलॉजी और हेल्थ स्टार्टअप्स के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाएगा।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में नए भारत की नई तस्वीर

    सीआईआई हेल्थकेयर समिट 2026 में मिली यह पहचान केवल जीआईएमएस की उपलब्धि नहीं, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारत का सरकारी स्वास्थ्य तंत्र भी अब नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ग्रेटर नोएडा स्थित जीआईएमएस का यह मॉडल भविष्य में देशभर के मेडिकल संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।

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