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Tuesday, August 11, 2026
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    ग्रेटर नोएडा : शिव शक्ति मंदिर ट्रस्ट पर करोड़ों की अनियमितताओं की आशंका, जिला प्रशासन ने गठित की जांच समिति; आय-व्यय और ट्रस्ट गठन की होगी पड़ताल

    Fear of irregularities of crores on Shiv Shakti temple trust, district administration formed an investigation committee; income-expenditure and trust formation will be investigated

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-2 स्थित शिव शक्ति मंदिर ट्रस्ट को लेकर उठे वित्तीय अनियमितताओं और पारदर्शिता के सवालों ने अब प्रशासनिक जांच का रूप ले लिया है। मंदिर की आय-व्यय, ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया और सदस्यता से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है। इस कार्रवाई के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से उठ रहे सवालों के जवाब अब सामने आ सकेंगे।

    सेक्टर डेल्टा-2 आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष रिंकू भाटी ने बताया कि मंदिर में पहले से विधिवत मंदिर समिति मौजूद होने के बावजूद नियमों को दरकिनार कर ट्रस्ट का गठन किए जाने का आरोप है। उनका कहना है कि वर्षों से मंदिर में प्राप्त दानराशि, सदस्यता शुल्क और अन्य आय का सार्वजनिक हिसाब-किताब श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया।

    दानराशि और सदस्यता शुल्क पर उठे सवाल

    शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रमोद भाटी के नेतृत्व में मंदिर में आने वाली दानराशि, आजीवन एवं सामान्य सदस्यता के नाम पर एकत्र धनराशि तथा ट्रस्ट गठन की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक नहीं किया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि ट्रस्ट में कितने सदस्य बनाए गए, उन्हें किस प्रक्रिया के तहत सदस्य बनाया गया और उनसे कितनी धनराशि ली गई।

    इन सभी मुद्दों पर पारदर्शिता नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

    उपजिलाधिकारी सदर ने गठित की जांच समिति

    शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी (सदर), गौतमबुद्ध नगर ने जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति को मंदिर ट्रस्ट एवं समिति के आय-व्यय, ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया, बायलॉज के अनुरूप सदस्यता और संबंधित अभिलेखों की जांच करने का दायित्व सौंपा गया है।

    जांच समिति उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर यह भी जांच करेगी कि ट्रस्ट का गठन निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ या नहीं तथा वित्तीय लेन-देन में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई।

    श्रद्धालुओं में पारदर्शिता की मांग तेज

    स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर आस्था का केंद्र है और यहां आने वाली प्रत्येक दानराशि जनता की आस्था से जुड़ी होती है। ऐसे में मंदिर की आय और व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। श्रद्धालुओं ने मांग की है कि— मंदिर की आय-व्यय का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। सदस्यता शुल्क एवं दानराशि का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।

    ट्रस्ट गठन की वैधानिकता की जांच कराई जाए।

    यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सिद्ध हो, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
    जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, यदि आवश्यक हो।

    प्रशासनिक जांच से बढ़ीं उम्मीदें

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा जांच समिति का गठन यह दर्शाता है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    हालांकि, इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आना भी आवश्यक है। जांच पूरी होने के बाद ही प्रशासन अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचेगा। यदि आरोपित पक्ष अपनी प्रतिक्रिया जारी करता है, तो उसे भी इस मामले में शामिल किया जाना चाहिए ताकि सभी पक्षों का दृष्टिकोण सामने आ सके।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि “मंदिर किसी व्यक्ति या समूह की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष प्रबंधन सुनिश्चित होना चाहिए।”

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