नोएडा, द न्यूज क्लिक। उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाले शहरों में शामिल नोएडा आज भी पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने शहर की मूलभूत व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि अरबों रुपये का टैक्स देने के बावजूद नागरिकों को न तो शुद्ध पेयजल मिल रहा है और न ही आधुनिक एवं भरोसेमंद विद्युत व्यवस्था।
उन्होंने कहा कि नोएडा को विश्वस्तरीय शहर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। कई क्षेत्रों में लोगों को उच्च टीडीएस (TDS) वाला पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि बिजली व्यवस्था भी पुराने ढांचे पर निर्भर है। आए दिन होने वाली तकनीकी खराबियां, लो-वोल्टेज और बिजली आपूर्ति में बाधाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि आधुनिक शहरों में अत्याधुनिक बिजली वितरण प्रणाली, स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल सेवाएं होनी चाहिए, लेकिन नोएडा में कई स्थानों पर वर्षों पुरानी व्यवस्था ही संचालित हो रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था का आधुनिकीकरण नहीं किया गया तो भविष्य में समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि जनता ने विकास की उम्मीद के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुना था। अब समय आ गया है कि नागरिकों को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाई दें। उनका कहना था कि स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली और सरल प्रशासनिक सेवाएं किसी भी आधुनिक शहर की पहली आवश्यकता होती हैं।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किसी उपभोक्ता को बिजली बिल में संशोधन कराना हो तो उसे एक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, मीटर बदलवाने के लिए दूसरे कार्यालय जाना पड़ता है और नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए किसी अन्य कार्यालय में आवेदन करना पड़ता है। इस बिखरी हुई व्यवस्था के कारण आम नागरिकों को अनावश्यक समय और धन दोनों खर्च करने पड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी की अवधारणा के अनुरूप सभी बिजली सेवाओं के लिए एकीकृत व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। ऑनलाइन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाकर शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
दिव्य कृष्णात्रेय ने यह भी मांग की कि नोएडा में पेयजल की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, पानी की नियमित जांच हो तथा जिन क्षेत्रों में टीडीएस अधिक है वहां शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। साथ ही बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाकर ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाए और पुराने उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाए।
उन्होंने कहा कि नोएडा प्रदेश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख केंद्र है और यहां रहने वाले लाखों नागरिक बेहतर सुविधाओं के हकदार हैं। यदि शहर राज्य को सबसे अधिक राजस्व देने वालों में शामिल है, तो यहां की मूलभूत सुविधाएं भी उसी स्तर की होनी चाहिए।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने अंत में प्रशासन, विद्युत विभाग और नोएडा प्राधिकरण से संयुक्त कार्ययोजना बनाकर पेयजल और बिजली से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की, ताकि नोएडा वास्तव में विश्वस्तरीय और नागरिक-अनुकूल शहर बन सके।

