नोएडा, रफ़्तार टूडे। भारतीय जनता पार्टी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नए क्षेत्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब संगठन के विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों में नई जिम्मेदारियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विशेष रूप से भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर चर्चाओं का दौर जारी है। संगठन के विभिन्न स्तरों पर कई नेता अपनी सक्रियता बढ़ा चुके हैं और संभावित दावेदारों के नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष के लिए एक भूमाफिया भी शामिल है। इस पद के लिए कांग्रेस छोड भाजपा में शामिल हुए एक मुस्लिम नेता का नाम भी शामिल है। वही नेता एक बड़े नेता की चापलूसी करने में बिजी रहते है। उन्हीं की बदौलत यह नेता उत्पादन हासिल करने का ख्वाब देख रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, अल्पसंख्यक मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पद के लिए कई पुराने और नए चेहरे प्रयासरत हैं। इनमें कुछ ऐसे नेता भी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने हाल के वर्षों में अन्य दलों को छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। संगठन के भीतर यह चर्चा भी है कि कुछ नए दावेदार अपने राजनीतिक संपर्कों और वरिष्ठ नेताओं के समर्थन के आधार पर जिम्मेदारी पाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में एक ऐसे मुस्लिम नेता के नाम की भी चर्चा है, जो कुछ वर्ष पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि वह भी इस महत्वपूर्ण पद के लिए प्रयास कर रहे हैं। वहीं, पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता अपेक्षाकृत कम रही है। इन चर्चाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित नेता की ओर से भी इस विषय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक नियुक्तियों में अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करता है। नियुक्ति के दौरान केवल व्यक्तिगत दावेदारी नहीं, बल्कि संगठन के प्रति समर्पण, कार्यशैली, जनसंपर्क, सक्रियता और पार्टी के लिए किए गए योगदान जैसे कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। यही कारण है कि दावेदारों के नामों पर भले ही चर्चाएं चल रही हों, लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व की सहमति से ही लिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में अल्पसंख्यक मोर्चा सहित विभिन्न मोर्चों में ऐसे चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है, जो संगठन के विस्तार और समाज के विभिन्न वर्गों तक पार्टी की पहुंच मजबूत करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
फिलहाल पार्टी की ओर से अल्पसंख्यक मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पद को लेकर किसी भी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए संभावित दावेदारों को लेकर चल रही चर्चाओं को केवल राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
राजनीतिक गलियारों में अब सभी की निगाहें भाजपा नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि संगठन अनुभव और सक्रियता को प्राथमिकता देता है या किसी नए चेहरे पर भरोसा जताकर नई जिम्मेदारी सौंपता है। फिलहाल दावेदारों की सक्रियता और अंदरूनी चर्चाएं राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

