नोएडा, द न्यूज क्लिक। नोएडा प्राधिकरण के बाह्य विज्ञापन विभाग से जुड़े एक पुराने मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ARC Outdoor Media Limited द्वारा टेंडर प्रक्रिया के दौरान 5 करोड़ रुपये का कथित फर्जी सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट लगाया गया था। इस संबंध में संबंधित बैंक की ओर से 28 जनवरी 2026 को अपना जवाब भी प्राधिकरण को भेज दिया गया, लेकिन छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कंपनी के खिलाफ कथित तौर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इस मामले को लेकर अब प्राधिकरण की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि बैंक की रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो इससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
जांच हुई, लेकिन परिणाम अब तक सार्वजनिक नहीं
आलोचकों का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण में कई मामलों में जांच तो शुरू कर दी जाती है, लेकिन उनकी अंतिम रिपोर्ट या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की जाती। उनका आरोप है कि कई मामलों में जांच लंबे समय तक लंबित रखी जाती है, जिससे संबंधित पक्षों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। इसी क्रम में ARC Outdoor Media Limited के मामले का भी उल्लेख किया जा रहा है। आरोप है कि बैंक की ओर से तथ्यों की पुष्टि के बावजूद कंपनी को अब तक ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक किया गया।
बाह्य विज्ञापन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
मामले को लेकर यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि बाह्य विज्ञापन विभाग की ओर से अब तक इस विषय पर कोई स्पष्ट स्थिति क्यों नहीं रखी गई। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि किसी कंपनी के दस्तावेजों में अनियमितता पाई गई है, तो नियमानुसार कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है। साथ ही, सेक्टर-93 में हुए सीवरेज हादसे के संदर्भ का उल्लेख करते हुए यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि लापरवाही के आरोपों के बावजूद संबंधित ठेकेदारों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जीएम आर.पी. सिंह से मांगा गया पक्ष, उन्होंने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी
द न्यूज क्लिक की ओर से इस पूरे मामले में नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक आर.पी. सिंह से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उनसे व्हाट्सएप के माध्यम से सवाल भेजे गए, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। यदि भविष्य में उनका या प्राधिकरण का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
जनहित में उठ रहे अहम सवाल
यह मामला अब केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ गया है। यदि किसी दस्तावेज को लेकर गंभीर अनियमितता के आरोप हैं और संबंधित बैंक का जवाब भी उपलब्ध है, तो यह अपेक्षा की जाती है कि जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा उसका निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाए। जनता और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्राधिकरण को स्पष्ट रूप से स्थिति बतानी चाहिए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कंपनी के खिलाफ नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी और भविष्य में टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
नोट:प्रकाशित किया जाएगा।

