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Tuesday, September 1, 2026
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    PM Mann ki Baat News : ‘मन की बात’ में गूंजा जीबीयू का मिशन शक्तिसैट, 108 देशों की बेटियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़कर बना वैश्विक मंच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की पहल की सराहना, छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक सीखने और व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का प्रयास; जल्द जीबीयू में स्थापित होगा सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन

    मिशन शक्तिसैट के सफल आयोजन में डीन एकेडमिक्स प्रो. राजीव वार्ष्णेय, डीन प्लानिंग एंड रिसर्च प्रो. एस. धनलक्ष्मी और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में उल्लेख के बाद मिशन शक्तिसैट को मिली राष्ट्रीय पहचान ने जीबीयू की अंतरिक्ष शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी योजनाओं को नई गति दी है। 108 देशों की छात्राओं को जोड़ने वाली यह पहल आने वाले समय में अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी नवाचार और महिला नेतृत्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो सकती है।

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू), ग्रेटर नोएडा की अंतरिक्ष विज्ञान और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी वैश्विक पहल ‘मिशन शक्तिसैट’ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित मिशन शक्तिसैट का उल्लेख करते हुए इसकी सराहना की। प्रधानमंत्री ने इस पहल को बेटियों के सपनों को अंतरिक्ष तक पहुंचाने और दुनिया के अलग-अलग देशों की छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान एवं उपग्रह तकनीक से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में रेखांकित किया। प्रधानमंत्री द्वारा मिशन शक्तिसैट का उल्लेख किए जाने के बाद गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में उत्साह का माहौल है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह उपलब्धि केवल संस्थान के लिए गौरव का विषय नहीं है, बल्कि इससे भारत में छात्राओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नई प्रेरणा मिलेगी।

    108 देशों की छात्राओं को एक मंच पर लाने की पहल

    गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 19वें स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर 23 अगस्त से मिशन शक्तिसैट की शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य दुनिया के विभिन्न देशों की छात्राओं को एक साझा मंच उपलब्ध कराना और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान तथा अत्याधुनिक तकनीक के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना है। मिशन के तहत 108 देशों की छात्राओं को जोड़ा गया है। उन्हें सैटेलाइट निर्माण, पेलोड डेवलपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिस्टम इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारत से भी 20 विद्यार्थियों का चयन इस विशेष प्रशिक्षण के लिए किया गया है।

    इस वैश्विक पहल के माध्यम से छात्राओं को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष तकनीक को समझने और उसके व्यावहारिक पक्ष से जुड़ने का अवसर भी दिया जा रहा है। विभिन्न देशों से जुड़े वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए अंतरिक्ष विज्ञान के बदलते स्वरूप और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी साझा की।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ऑनलाइन उद्घाटन

    मिशन शक्तिसैट का शुभारंभ 23 अगस्त को जीबीयू के स्थापना दिवस और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह के साथ हुआ। कार्यक्रम का ऑनलाइन उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ ने किया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया। मिशन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को यह विश्वास दिलाना है कि विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में उनकी भागीदारी केवल संभव ही नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत भी है।

    प्रधानमंत्री के उल्लेख को विश्वविद्यालय ने बताया गौरव का विषय

    जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में मिशन शक्तिसैट का उल्लेख किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा विश्वविद्यालय की इस पहल को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलना पूरे जीबीयू परिवार के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें भविष्य की तकनीकों, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। मिशन शक्तिसैट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    108 देशों की बेटियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़कर बना वैश्विक मंच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की पहल की सराहना

    उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में विद्यार्थियों को वास्तविक तकनीकी अनुभव उपलब्ध कराना जरूरी है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि जीबीयू के विद्यार्थी अंतरिक्ष विज्ञान और संबंधित तकनीकों को केवल किताबों में न पढ़ें, बल्कि उन्हें प्रयोग और वास्तविक डेटा के माध्यम से भी समझें।

    जल्द स्थापित होगा सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन

    गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा और अनुसंधान को नई ऊंचाई देने के लिए सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के अनुसार, ग्राउंड स्टेशन स्थापित होने के बाद विद्यार्थी और शोधार्थी सीधे सैटेलाइट से डेटा प्राप्त कर सकेंगे और उसका अध्ययन कर पाएंगे। यह सुविधा विद्यार्थियों को वास्तविक सैटेलाइट डेटा के साथ काम करने का अवसर देगी। इससे वे डेटा रिसीविंग, विश्लेषण और अंतरिक्ष आधारित अनुसंधान की व्यावहारिक प्रक्रिया को समझ सकेंगे। विश्वविद्यालय के लिए यह कदम उसे अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने साझा किए अनुभव

    मिशन शक्तिसैट के दौरान 29 अगस्त को ग्रुप कैप्टन एवं अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने अपने अंतरिक्ष अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए और अंतरिक्ष मिशनों की चुनौतियों तथा वहां काम करने के अनुभवों के बारे में जानकारी दी। उनके साथ संवाद विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों को अंतरिक्ष यात्री के प्रत्यक्ष अनुभव सुनने और अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।

    कार्यक्रम में रिपब्लिक ऑफ सेशेल्स की फर्स्ट लेडी वेरोनिक हरमिनी सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने मिशन के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को और मजबूत किया।

    IN-SPACe के सहयोग से रॉकेट लॉन्चिंग का प्रदर्शन

    30 अगस्त को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय परिसर में IN-SPACe के सहयोग से रॉकेट लॉन्चिंग का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने रॉकेट लॉन्चिंग की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा और अंतरिक्ष तकनीक के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर प्राप्त किया। इस प्रदर्शन ने विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर उत्सुकता और बढ़ाई। रॉकेट तकनीक, लॉन्च प्रक्रिया और अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े विषयों को प्रत्यक्ष रूप से देखने से विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर मिला।

    महिला सशक्तिकरण और अंतरिक्ष शिक्षा का अनूठा संगम

    मिशन शक्तिसैट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका महिला सशक्तिकरण और अंतरिक्ष शिक्षा के बीच सेतु बनाना है। 108 देशों की छात्राओं को एक मंच पर लाकर उन्हें अंतरिक्ष तकनीक से जोड़ना वैश्विक स्तर पर सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जीबीयू की इस पहल के माध्यम से छात्राओं को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और अनुसंधान के क्षेत्रों में अपनी संभावनाओं को पहचानने का अवसर मिल रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्राओं के बीच वैज्ञानिक संवाद और सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    मिशन शक्तिसैट के सफल आयोजन में डीन एकेडमिक्स प्रो. राजीव वार्ष्णेय, डीन प्लानिंग एंड रिसर्च प्रो. एस. धनलक्ष्मी और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में उल्लेख के बाद मिशन शक्तिसैट को मिली राष्ट्रीय पहचान ने जीबीयू की अंतरिक्ष शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी योजनाओं को नई गति दी है। 108 देशों की छात्राओं को जोड़ने वाली यह पहल आने वाले समय में अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी नवाचार और महिला नेतृत्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो सकती है।

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