नोएडा, द न्यूज क्लिक। पुलिस की जिम्मेदारी आमतौर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर अंकुश लगाने से जुड़ी मानी जाती है, लेकिन जब किसी इंसान की जिंदगी बचाने के लिए हर सेकंड महत्वपूर्ण हो, तब पुलिस की तत्परता जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक भूमिका निभा सकती है। गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस ने बुधवार, 9 सितंबर 2026 को इसी मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता की मिसाल पेश की। चंडीगढ़ से हृदय प्रत्यारोपण के लिए लाए गए एक हृदय को हिंडन एयरपोर्ट, गाजियाबाद से फोर्टिस अस्पताल, सेक्टर-62, नोएडा तक पहुंचाने के लिए नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। पुलिस के समन्वित प्रयासों के चलते करीब 20 किलोमीटर की दूरी महज 16 मिनट में तय कराई गई।
हर सेकंड था बेहद महत्वपूर्ण
हृदय प्रत्यारोपण में समय की अहमियत अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में एयरपोर्ट से अस्पताल तक हृदय को निर्धारित समय में सुरक्षित पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। सामान्य यातायात के बीच एंबुलेंस को बिना अनावश्यक रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने पहले से यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया और एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। ग्रीन कॉरिडोर के दौरान संबंधित मार्ग पर यातायात को व्यवस्थित करते हुए एंबुलेंस की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की गई। इसका परिणाम यह रहा कि लगभग 20 किलोमीटर का रास्ता केवल 16 मिनट में पूरा कर एंबुलेंस हृदय को फोर्टिस अस्पताल सेक्टर-62 पहुंचाने में सफल रही।
कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में मानवीय पहल
गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में कमिश्नरेट पुलिस कानून-व्यवस्था के साथ जनसेवा से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही है। हृदय को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए बनाया गया यह ग्रीन कॉरिडोर पुलिस के इसी मानवीय पक्ष को सामने लाता है। इस अभियान में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए चुनौती सिर्फ यातायात नियंत्रित करना नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि एंबुलेंस को रास्ते में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। ऐसे मामलों में कुछ मिनटों का अंतर भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
कमिश्नरेट क्षेत्र में पहली बार हृदय के लिए ग्रीन कॉरिडोर
गौतमबुद्ध नगर पुलिस के अनुसार, कमिश्नरेट क्षेत्र में पहली बार हृदय प्रत्यारोपण के लिए इस तरह ग्रीन कॉरिडोर बनाकर हृदय को सुरक्षित रूप से अस्पताल तक पहुंचाया गया। अभियान के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अस्पताल प्रबंधन, स्टाफ, मरीज के परिजनों और आम लोगों की ओर से पुलिस की तत्परता की सराहना की गई। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस, अस्पताल प्रशासन, एंबुलेंस और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत थी। सभी स्तरों पर तालमेल के चलते हृदय को कम से कम समय में अस्पताल तक पहुंचाना संभव हुआ।
खाकी का दिखा मानवीय चेहरा
पुलिस की वर्दी को अक्सर अनुशासन, कानून और सख्ती से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसे अवसरों पर खाकी का मानवीय चेहरा सामने आता है। जिस एंबुलेंस में हृदय अस्पताल की ओर बढ़ रहा था, उसके साथ एक मरीज की जिंदगी की उम्मीद भी जुड़ी थी। सड़क पर यातायात को नियंत्रित करने और एंबुलेंस को लगातार रास्ता देने में जुटे पुलिसकर्मियों के लिए यह महज एक ट्रैफिक ऑपरेशन नहीं था। यह एक ऐसी मुहिम थी, जिसमें उनके हर निर्णय और हर सेकंड की अपनी अहमियत थी।
‘अंगदान महादान’ का दिया संदेश
गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने इस अवसर पर लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करते हुए ‘अंगदान महादान’ का संदेश भी दिया। पुलिस की ओर से कहा गया कि जीवन बचाने के इस अभियान में समाज की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। अंगदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को जीवन का नया अवसर मिल सकता है। चंडीगढ़ से नोएडा तक हृदय को पहुंचाने के लिए बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर यह भी दर्शाता है कि अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में चिकित्सा संस्थानों के साथ पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की तत्परता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
जनता के भरोसे को मजबूत करता है ऐसा प्रयास
गौतमबुद्ध नगर पुलिस की इस पहल ने यह संदेश दिया कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। आपात परिस्थितियों में पुलिस का त्वरित निर्णय, यातायात प्रबंधन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय किसी की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। 20 किलोमीटर की दूरी 16 मिनट में तय कर हृदय को अस्पताल पहुंचाने का यह अभियान गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता का उल्लेखनीय उदाहरण बनकर सामने आया है।

