29.1 C
Greater Noida
Tuesday, August 25, 2026
More

    Fortis Hospital News : फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में 84 वर्षीय हार्ट फेलियर मरीज का MitraClip से सफल इलाज, क्षेत्र में पहली बार हुआ ऐसा उपचार, बिना सीने में बड़ा चीरा लगाए माइट्रल वाल्व का किया गया उपचार, गंभीर हार्ट फेलियर और अन्य जटिलताओं से जूझ रहा था मरीज

    फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की फैसिलिटी डायरेक्टर बिंदु शर्मा ने कहा कि जटिल हृदय रोगों के उपचार के लिए केवल आधुनिक तकनीक ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट-कार्डियोलॉजी डॉ. हरनीश सिंह भाटिया ने कहा कि यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण मामला था। मरीज की उम्र 84 वर्ष थी और वह गंभीर हार्ट फेलियर से जूझ रहे थे। इसके अलावा हाल ही में उनकी हृदय की धमनियों में स्टेंट डाले गए थे और केवल एक गुर्दा काम कर रहा था। डॉ. भाटिया के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का जोखिम काफी अधिक हो सकता है।

    Must read

    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में गंभीर हार्ट फेलियर से जूझ रहे 84 वर्षीय मरीज का MitraClip प्रक्रिया के जरिए सफलतापूर्वक उपचार किया गया। मरीज के हृदय का माइट्रल वाल्व ठीक से बंद नहीं हो रहा था, जिसके कारण रक्त हृदय में पीछे की ओर रिस रहा था और पहले से कमजोर हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था। मरीज की अधिक उम्र, कमजोर हृदय, केवल एक गुर्दे के काम करने और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं को देखते हुए पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी में जोखिम काफी अधिक था। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव MitraClip तकनीक के माध्यम से बिना सीने में बड़ा चीरा लगाए वाल्व लीकेज को कम करने में सफलता हासिल की।

    अस्पताल के अनुसार, ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्र में अपनी तरह का यह पहला उपचार है। इस प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और स्थिर स्थिति में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल कार्डियोलॉजी टीम की निगरानी में उनका नियमित फॉलो-अप किया जा रहा है।

    सांस फूलने और बार-बार हार्ट फेलियर की समस्या से जूझ रहा था मरीज

    84 वर्षीय मरीज जब फोर्टिस ग्रेटर नोएडा पहुंचे तो उन्हें लगातार सांस फूलने, कमजोरी और बार-बार हार्ट फेलियर की समस्या हो रही थी। विस्तृत चिकित्सकीय जांच के दौरान पता चला कि उनके हृदय का माइट्रल वाल्व सही तरीके से बंद नहीं हो रहा था। इसके कारण हृदय से रक्त का कुछ हिस्सा आगे जाने के बजाय पीछे की ओर रिस रहा था।

    माइट्रल वाल्व में इस तरह के रिसाव को माइट्रल रिगर्जिटेशन कहा जाता है। इससे हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। पहले से कमजोर हृदय में यह स्थिति समस्या को और गंभीर बना सकती है।

    जांच में मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता यानी इजेक्शन फ्रैक्शन लगभग 30-35 प्रतिशत पाई गई। इसके अलावा मरीज के मेडिकल इतिहास ने भी उपचार को चुनौतीपूर्ण बना दिया था।

    फरवरी 2026 में डाले गए थे दो स्टेंट

    डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज के हृदय की धमनियों में अवरोध के उपचार के लिए फरवरी 2026 में दो स्टेंट डाले जा चुके थे। इसके बावजूद उनकी हृदय संबंधी समस्या बनी हुई थी। मरीज का केवल एक गुर्दा काम कर रहा था। इसके साथ ही प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ी हुई थी और उन्हें गंभीर यूरिनरी संक्रमण की समस्या भी थी। 84 वर्ष की उम्र के साथ इतनी सारी स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण ओपन-हार्ट सर्जरी का विकल्प बेहद जोखिमपूर्ण माना गया।

    ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, हृदय की स्थिति और सर्जरी से जुड़े संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद वैकल्पिक उपचार पद्धति पर विचार किया।

    बिना सीने में चीरा लगाए हुआ वाल्व का उपचार

    मरीज के लिए MitraClip प्रक्रिया को उपचार के विकल्प के तौर पर चुना गया। यह एक मिनिमली इनवेसिव, कैथेटर आधारित तकनीक है, जिसमें ओपन-हार्ट सर्जरी की तरह सीने को खोलने या बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होती। प्रक्रिया के दौरान पैर की रक्त वाहिका के रास्ते एक कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया गया। अत्याधुनिक 3D इमेजिंग तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने हृदय के माइट्रल वाल्व की स्थिति को बारीकी से देखा और लीक वाले हिस्से तक MitraClip XTW G4 क्लिप पहुंचाई।

    क्लिप को वाल्व के उपयुक्त स्थान पर लगाया गया, जिससे वाल्व को बेहतर तरीके से बंद करने और रक्त के पीछे की ओर होने वाले रिसाव को कम करने में मदद मिली। अस्पताल के अनुसार, पूरी प्रक्रिया बिना किसी बड़ी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरी हुई।

    उपचार के बाद मरीज की स्थिति में आया सुधार

    प्रक्रिया के बाद मरीज की चिकित्सकीय स्थिति में सुधार देखा गया। सांस फूलने सहित हार्ट फेलियर से जुड़े लक्षणों में राहत मिली और उनकी स्थिति स्थिर होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों की टीम के मुताबिक, ऐसे मरीजों में उपचार के बाद नियमित फॉलो-अप बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी के तहत मरीज की कार्डियोलॉजी टीम द्वारा निगरानी की जा रही है।

    समय पर उपचार नहीं मिलने पर बढ़ सकता था खतरा

    चिकित्सकों के अनुसार, गंभीर माइट्रल वाल्व लीकेज का समय पर उपचार नहीं होने पर कमजोर हृदय पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे हार्ट फेलियर की स्थिति और गंभीर होने का खतरा रहता है। मरीज को बार-बार अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है और उसकी जीवन गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।

    ऐसे हाई-रिस्क मरीज में उपचार का उद्देश्य केवल वाल्व के रिसाव को कम करना ही नहीं, बल्कि हृदय पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करना और मरीज के लक्षणों में सुधार लाना भी होता है।

    “मरीज की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी”

    फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट-कार्डियोलॉजी डॉ. हरनीश सिंह भाटिया ने कहा कि यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण मामला था। मरीज की उम्र 84 वर्ष थी और वह गंभीर हार्ट फेलियर से जूझ रहे थे। इसके अलावा हाल ही में उनकी हृदय की धमनियों में स्टेंट डाले गए थे और केवल एक गुर्दा काम कर रहा था। डॉ. भाटिया के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का जोखिम काफी अधिक हो सकता है। इसलिए मरीज की स्थिति और उपलब्ध उपचार विकल्पों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद मिनिमली इनवेसिव MitraClip प्रक्रिया को चुना गया।

    उन्होंने कहा कि इस तकनीक की मदद से बिना सीने में बड़ी सर्जरी किए लीक कर रहे माइट्रल वाल्व का उपचार संभव हुआ। उचित मरीज चयन, अनुभवी विशेषज्ञों की टीम और आधुनिक कार्डियक तकनीक के संयोजन से ऐसे हाई-रिस्क मरीजों के उपचार के विकल्प बढ़ रहे हैं।

    घर के नजदीक उपलब्ध हो रहे उन्नत उपचार

    फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की फैसिलिटी डायरेक्टर बिंदु शर्मा ने कहा कि जटिल हृदय रोगों के उपचार के लिए केवल आधुनिक तकनीक ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का प्रयास है कि मरीजों को उनके घर के नजदीक ही आधुनिक और जटिल कार्डियक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस मामले में भी मरीज की उम्र और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनकी स्थिति के अनुरूप कम इनवेसिव उपचार उपलब्ध कराया गया।

    बिंदु शर्मा के अनुसार, इस तरह के मामलों में मरीज की हर स्वास्थ्य चुनौती का व्यापक मूल्यांकन कर उपचार की रणनीति तैयार करना जरूरी है। MitraClip जैसी तकनीक हाई-रिस्क मरीजों के लिए उपचार के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    क्षेत्र में उन्नत कार्डियक केयर की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

    फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में 84 वर्षीय मरीज का MitraClip से उपचार अस्पताल की कार्डियक सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। खासतौर पर ऐसे मरीज में यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण थी, जिसकी उम्र अधिक होने के साथ-साथ हार्ट फेलियर, कम पंपिंग क्षमता, किडनी संबंधी स्थिति और हाल में स्टेंट लगाए जाने जैसी कई जटिलताएं मौजूद थीं। अस्पताल के अनुसार, इस प्रक्रिया ने यह दिखाया है कि आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकों के जरिए उन मरीजों के लिए भी उपचार के विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जिनमें पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का जोखिम अधिक हो।

    हालांकि, MitraClip हर मरीज के लिए उपयुक्त उपचार नहीं होता और इसका निर्णय मरीज की वाल्व की स्थिति, हार्ट फेलियर की गंभीरता, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं और विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की टीम ने इस सफल उपचार को जटिल हृदय रोगों के प्रबंधन में आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और मल्टी-डिसिप्लिनरी केयर के प्रभावी इस्तेमाल का उदाहरण बताया है।

    द न्यूज क्लिक की न्यूज

    More articles

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Latest article