नोएडा, द न्यूज क्लिक। नोएडा के सेक्टर-50 स्थित मेदांता अस्पताल एक बार फिर विवादों में आ गया है। अस्पताल पर एक मरीज के परिजनों ने इलाज के बिल में कथित अनियमितता और अतिरिक्त मद जोड़कर अधिक रकम वसूलने का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि बुखार के इलाज के लिए भर्ती मरीज के बिल में पथरी और कोविड-19 उपचार से संबंधित शुल्क भी जोड़ दिए गए। बिल देखने के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध जताया, जिसके चलते कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
बुखार के इलाज के लिए भर्ती कराया था मरीज
परिजनों के अनुसार मरीज को तेज बुखार की शिकायत के बाद मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि उपचार के दौरान उन्हें बिल की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। डिस्चार्ज के समय जब अंतिम बिल सौंपा गया, तब उसमें ऐसी चिकित्सकीय सेवाओं और उपचारों का भी उल्लेख था, जिनका मरीज से कोई संबंध नहीं था। परिजनों का कहना है कि बिल में पथरी के इलाज और कोविड उपचार से जुड़े शुल्क देखकर वे हैरान रह गए।
बिल को लेकर अस्पताल में हुआ हंगामा
बिल में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। सूचना मिलने पर सेक्टर-49 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने मामले में लिखित शिकायत प्राप्त कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस कर रही है शिकायत की जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच की जा रही है। अस्पताल के बिल, मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिलिंग में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या नहीं। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी उठ चुके हैं बिलिंग को लेकर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों की बिलिंग प्रक्रिया को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि प्रत्येक मामले के तथ्य अलग-अलग होते हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों को बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखनी चाहिए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों के मन में किसी प्रकार की शंका न रहे।
स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता की मांग
इस घटना के बाद मरीजों के अधिकारों और निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि मरीजों को उपचार शुरू होने से पहले संभावित खर्च की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए और डिस्चार्ज के समय प्रत्येक मद का विस्तृत एवं पारदर्शी बिल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास भी बना रहेगा।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

