ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। शारदा हॉस्पिटल ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत 22 वर्षीय प्रीति कुमारी का निःशुल्क इलाज करते हुए उनके चेहरे से एक बड़े सौम्य (बेनाइन) मिड-फेशियल ट्यूमर को दुर्लभ और दाग-रहित सर्जरी के माध्यम से सफलतापूर्वक निकालकर उन्हें नई जिंदगी दी। इस जटिल सर्जरी में न केवल ट्यूमर को पूरी तरह हटाया गया, बल्कि मरीज के चेहरे की बनावट, दृष्टि से जुड़े महत्वपूर्ण अंगों और मुंह की सामान्य कार्यक्षमता को भी सुरक्षित रखा गया। सबसे खास बात यह रही कि सर्जरी के बाद चेहरे पर किसी प्रकार का बाहरी निशान नहीं रहा।

प्रीति पिछले करीब 12 वर्षों से चेहरे पर लगातार बढ़ रही सूजन से परेशान थीं। समय के साथ ट्यूमर आंख के सॉकेट और नाक के आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं तक फैल गया था, जिससे चेहरे की बनावट प्रभावित होने के साथ-साथ सामान्य कार्यों में भी कठिनाई आने लगी थी। आयुष्मान भारत योजना के तहत उन्हें बिना किसी आर्थिक बोझ के अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराया गया।
विस्तृत चिकित्सकीय और रेडियोलॉजिकल जांच के बाद शारदा हॉस्पिटल के क्रेनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के निदेशक एवं यूनिट हेड डॉ. रोहित पुंगा ने ले फोर्ट एक्सेस ऑस्टियोटॉमी तकनीक के माध्यम से ट्रांसओरल रिसेक्शन सर्जरी की योजना बनाई। ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी रूप से एक्सटर्नल कैरोटिड आर्टरी को नियंत्रित किया गया। पूरी सर्जरी मुंह के भीतर से की गई, जिससे चेहरे पर किसी प्रकार का बाहरी चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
सर्जरी के दौरान ऊपरी जबड़े की हड्डी को सावधानीपूर्वक हटाकर ट्यूमर तक पहुंच बनाई गई और उसे पूरी तरह निकाल दिया गया। इस प्रक्रिया में आंख के सॉकेट, नाक की संरचना, गाल की हड्डी, ऊपरी जबड़े तथा दांतों जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखा गया। इसके बाद ऊपरी जबड़े को पुनः उसकी सामान्य स्थिति में स्थापित कर टाइटेनियम प्लेटों से स्थिर किया गया, जिससे चेहरे की प्राकृतिक बनावट और कार्यक्षमता बरकरार रही।
डॉ. रोहित पुंगा ने बताया कि यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण मामला था क्योंकि वर्षों से बढ़ रहे ट्यूमर ने चेहरे की संरचना को प्रभावित कर दिया था। उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य ट्यूमर को पूरी तरह निकालने के साथ-साथ मरीज की चेहरे की सुंदरता, दृष्टि संबंधी संरचनाओं और मुंह की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखना था। ट्रांसओरल ले फोर्ट तकनीक के कारण बिना बाहरी चीरे के सफल सर्जरी संभव हो सकी, जिससे मरीज की रिकवरी भी तेजी से हुई। सर्जरी के बाद मरीज के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया और वह तेजी से स्वस्थ हो रही हैं।
शारदा हॉस्पिटल के ग्रुप सीईओ डॉ. कौसर शाह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना प्रत्येक मरीज को आधुनिक और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई यह सफल स्कारलेस क्रेनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी इस बात का उदाहरण है कि उन्नत चिकित्सा तकनीक और सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं मिलकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का जीवन बदल सकती हैं।
शारदा हॉस्पिटल के अनुसार यह सफल उपचार जटिल क्रेनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में संस्थान की विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह मामला दर्शाता है कि समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गंभीर बीमारियों का भी सफल इलाज संभव है।

