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Tuesday, July 28, 2026
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    Yatharth Hospital News : यथार्थ हॉस्पिटल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस ‘साइलेंट किलर’ से रहें सतर्क, समय पर जांच और टीकाकरण से बचाएं अपना लिवर, समय पर पहचान से बच सकती है जान, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी, दूषित भोजन और पानी भी बन रहे खतरे की वजह

    डॉ. राकेश कुमार जगदीश, निदेशक – गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन ने कहा कि हर महीने उनकी ओपीडी में लगभग 15 से 20 हेपेटाइटिस के मरीज आते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर टीकाकरण, नियमित लिवर जांच और शुरुआती उपचार से लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर और लिवर फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

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    नोएडा, द न्यूज क्लिक। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक रहें और समय पर जांच व टीकाकरण कराकर अपने लिवर को सुरक्षित रखें। हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जो शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बढ़ती रहती है, इसलिए इसे “साइलेंट डिजीज” या “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है। यदि समय रहते इसका पता नहीं चलता, तो यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकती है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन और यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार है।

    समय पर पहचान से बच सकती है जान

    डॉ. अपूर्व पांडे, एडिशनल डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन, नई दिल्ली ने बताया कि हेपेटाइटिस आज भी एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। उनकी ओपीडी में हर महीने लगभग 100 से 150 हेपेटाइटिस के मरीज उपचार के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में लगातार थकान, मांसपेशियों में दर्द, बिना कारण वजन घटना और बाद में पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन अधिकतर लोग इन्हें सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस-बी संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध, दूषित सुई और संक्रमित मां से शिशु में फैलता है, जबकि हेपेटाइटिस-सी मुख्य रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है। हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है, वहीं हेपेटाइटिस-सी का आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में सफल इलाज संभव है।

    स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी

    डॉ. राकेश कुमार जगदीश, निदेशक – गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन ने कहा कि हर महीने उनकी ओपीडी में लगभग 15 से 20 हेपेटाइटिस के मरीज आते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर टीकाकरण, नियमित लिवर जांच और शुरुआती उपचार से लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर और लिवर फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

    यथार्थ हॉस्पिटल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस ‘साइलेंट किलर’ से रहें सतर्क, समय पर जांच और टीकाकरण से बचाएं अपना लिवर

    उन्होंने लोगों को संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, स्वस्थ वजन बनाए रखने, शराब और तंबाकू से दूरी बनाने तथा सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं का पालन करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि मधुमेह, मोटापा या परिवार में लिवर रोग का इतिहास रखने वाले लोगों को समय-समय पर लिवर की जांच अवश्य करानी चाहिए।

    दूषित भोजन और पानी भी बन रहे खतरे की वजह

    डॉ. आलोक दुबे, कंसल्टेंट – रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा ने बताया कि हेपेटाइटिस को “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से पहचान में नहीं आते। जब तक मरीज को कमजोरी, भूख कम लगना, पीलिया, गहरे रंग का पेशाब या पेट में सूजन जैसी समस्याएं महसूस होती हैं, तब तक लिवर काफी प्रभावित हो चुका होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं में हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई के मामले दूषित भोजन और प्रदूषित पानी के कारण तेजी से सामने आ रहे हैं। वहीं, हेपेटाइटिस-बी संक्रमित रक्त, असुरक्षित सुई, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित मां से शिशु में फैल सकता है। इसलिए स्वच्छ भोजन, साफ पेयजल, व्यक्तिगत स्वच्छता और समय पर टीकाकरण बेहद आवश्यक है।

    विशेषज्ञों की अपील

    यथार्थ अस्पताल के विशेषज्ञों ने विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर लोगों से अपील की कि वे हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक रहें, समय पर टीकाकरण कराएं, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। उनका कहना है कि यदि बीमारी की समय रहते पहचान हो जाए और उचित उपचार शुरू कर दिया जाए, तो लिवर को गंभीर क्षति से बचाया जा सकता है तथा व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, सतर्कता और समय पर उपचार ही हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे सशक्त माध्यम है।

    द न्यूज क्लिक की न्यूज

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