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Wednesday, August 19, 2026
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    GIMS Hospital News: GIMS ग्रेटर नोएडा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (BCLS) प्रमाणन पाठ्यक्रम, स्वास्थ्यकर्मियों को दिए गए जीवन रक्षक कौशल, निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने किया शुभारंभ, हृदयाघात और श्वसन आपात स्थितियों से निपटने का मिला प्रशिक्षण

    जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित कौशल-आधारित प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि "हृदय संबंधी आपात स्थितियों में सही समय पर और सही तकनीक के साथ किया गया हस्तक्षेप मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जीआईएमएस), ग्रेटर नोएडा ने चिकित्सा शिक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (BCLS) प्रमाणन पाठ्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ को हृदय एवं श्वसन संबंधी आपात स्थितियों में त्वरित और प्रभावी जीवन रक्षक उपचार देने के लिए प्रशिक्षित करना था।

    निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने किया शुभारंभ

    कार्यक्रम का उद्घाटन जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने किया। प्रशिक्षण सत्र में अस्पताल के 30 से अधिक डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया और आधुनिक जीवन रक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

    यह प्रमाणन पाठ्यक्रम एनेस्थीसिया विभाग के तत्वावधान में डॉ. नजिया नजीर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण टीम में डॉ. रुचि सिंह, डॉ. गरिमा सिन्हा, डॉ. विनय कुमार, डॉ. देबयान बिस्वास तथा पीजी रेजिडेंट्स शामिल रहे। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित (Evidence-Based) आपातकालीन चिकित्सा तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।

    हृदयाघात और श्वसन आपात स्थितियों से निपटने का मिला प्रशिक्षण

    प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (BCLS) और कम्प्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट (COLS) के बीच अंतर समझाया गया। साथ ही पुनर्जीवन (Resuscitation) के दौरान सही क्रम में किए जाने वाले जीवन रक्षक कदमों का अभ्यास कराया गया। विशेषज्ञों ने ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) के उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया। इसके अलावा घुटन (Choking) और अचानक हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) जैसी गंभीर स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया गया।

    निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने किया शुभारंभ, हृदयाघात और श्वसन आपात स्थितियों से निपटने का मिला प्रशिक्षण

    इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन का रहा सहयोग

    यह प्रमाणन कार्यक्रम इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन (IRCF) के सहयोग से आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसी आपात परिस्थितियों में त्वरित, सटीक और आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने तथा मरीज की जान बचाने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना था।

    समय पर उपचार से बचाई जा सकती हैं कई जिंदगियां : डॉ. राकेश गुप्ता

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित कौशल-आधारित प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “हृदय संबंधी आपात स्थितियों में सही समय पर और सही तकनीक के साथ किया गया हस्तक्षेप मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसलिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का नियमित प्रशिक्षण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”

    नैदानिक शिक्षा और मरीजों की सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा

    जीआईएमएस ने बताया कि बीसीएलएस प्रमाणन पाठ्यक्रम का सफल आयोजन संस्थान की ‘विद्या सेतु’ पहल के अंतर्गत नैदानिक शिक्षा, रोगी सुरक्षा और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संस्थान भविष्य में भी ऐसे कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, ताकि स्वास्थ्यकर्मी आधुनिक चिकित्सा तकनीकों में दक्ष होकर आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को बेहतर और समयबद्ध उपचार उपलब्ध करा सकें।

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