ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। बिसरख थाना पुलिस ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताकर एक जीएसटी कंसल्टेंट से 29 लाख रुपये की ठगी और जबरन वसूली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी जीएसटी जांच और जेल भेजने की धमकी देकर पीड़ित से लाखों रुपये ऐंठे थे। वारदात के दौरान एक आरोपी ने पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी भी पहन रखी थी, ताकि पीड़ित पर दबाव बनाया जा सके।
पुलिस के DCP शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 24.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा करीब 4.50 लाख रुपये कीमत की सोने की चेन, चांदी का कड़ा और अंगूठी भी बरामद हुई है। पुलिस का दावा है कि मामले में हड़पी गई रकम की शत-प्रतिशत बरामदगी कर ली गई है।
कार के आगे गाड़ी लगाकर रोका
पुलिस के अनुसार ADCP स्वतंत्र देव सिंह ने घटना 20 जुलाई की है। एक जीएसटी कंसल्टेंट अपने पालतू कुत्ते और लैपटॉप के साथ कार से जा रहे थे। इसी दौरान एस एस्पायर सोसाइटी के पास आरोपियों ने अपनी कार पीड़ित की कार के आगे लगाकर उसे रोक लिया। आरोपियों ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताते हुए पीड़ित से पूछताछ शुरू कर दी। उन्होंने दो फर्मों के नाम लेते हुए कथित तौर पर फर्जी ई-वे बिल और सत्यापन से जुड़ा मामला बताया। इसके बाद आरोपियों ने कार्रवाई करने और जेल भेजने की धमकी दी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने डर का माहौल बनाते हुए पीड़ित से 29 लाख रुपये की मांग की। इसके बाद उसे उसकी ही कार में बैठाकर अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया।
भाई के जरिए मंगवाए 29 लाख रुपये
आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित को इतना डरा दिया कि उसने अपने भाई के जरिए 29 लाख रुपये की नकदी मंगवाई। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को उसकी कार समेत छोड़ दिया और अपनी गाड़ी से वहां से फरार हो गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो वारदात के पीछे एक सुनियोजित गिरोह का हाथ होने की जानकारी सामने आई। जांच के दौरान आरोपियों की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
2021 से मुख्य आरोपी के संपर्क में था पीड़ित
पुलिस की जांच में इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशू पीड़ित को पहले से जानता था। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2021 में जीएसटी से संबंधित बिलों में कथित हेरफेर के मामले में पीड़ित को विभाग की ओर से नोटिस मिला था। इस मामले को निस्तारित कराने के प्रयास के दौरान कशिश और पीड़ित के बीच संपर्क हुआ था।
पुलिस का कहना है कि इसी पुराने संपर्क के कारण मुख्य आरोपी को पीड़ित के कामकाज और उसके जीएसटी संबंधी मामलों की जानकारी थी। आरोपियों ने कथित तौर पर इसी जानकारी का फायदा उठाकर पूरी वारदात की योजना बनाई।
पुलिस की वर्दी पहनकर बनाया दबाव
पूछताछ में मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वारदात के दौरान उसने पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहन रखी थी। उसने पीड़ित की कार भी चलाई। पीड़ित को कार की पिछली सीट पर बैठाया गया था और अन्य आरोपी भी उसके साथ मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने जीएसटी मामले में जेल भेजने की धमकी देकर पीड़ित पर लगातार दबाव बनाया। इस दौरान पीड़ित के पालतू कुत्ते को भी आरोपियों ने एक्सप्रेसवे पर अपने एक साथी को सौंप दिया था। इसके बाद रकम मिलने तक पीड़ित को आरोपियों के कब्जे में रखा गया। पैसे मिलने के बाद आरोपी पीड़ित को छोड़कर फरार हो गए।
कोई भी आरोपी पुलिसकर्मी नहीं
बिसरख पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में शामिल कोई भी आरोपी पुलिसकर्मी नहीं है। हालांकि, आरोपियों में कुछ लोग ऐसे जरूर हैं, जिनका सरकारी विभागों से जुड़ा काम या पूर्व संबंध रहा है। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशू यशोभूमि, द्वारका में डीसीपीओ (ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत है। दूसरा आरोपी राजेश पंवार दिल्ली सिविल डिफेंस से जुड़ा हुआ है। वहीं विवेक शर्मा एस्कोर्ट, माजरा-बल्लभगढ़ में डीसीपीओ के पद पर कार्यरत रहा है। अंकित शाही लोहे की ग्रिल और गेट बनाने का काम करता है, जबकि अंशुल दिल्ली में प्रॉपर्टी का कारोबार करता है। पुलिस अब आरोपियों के आपसी संबंध, वारदात की पूरी साजिश और इससे पहले इस तरह की किसी अन्य घटना में उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
फर्जी अधिकारी बनकर वसूली की साजिश
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, यह वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि पीड़ित की पृष्ठभूमि और उसके जीएसटी संबंधी काम की जानकारी के आधार पर योजना बनाकर की गई। आरोपियों ने पहले खुद को सरकारी अधिकारी के रूप में पेश किया और फिर फर्जी दस्तावेजी कार्रवाई, जांच और जेल भेजने का डर दिखाकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लिया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने जीएसटी से संबंधित जानकारी कहां से जुटाई और क्या इस गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हैं।
पुलिस ने की बड़ी बरामदगी
बिसरख पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से: 24.50 लाख रुपये नकद, करीब 4.50 लाख रुपये कीमत की सोने की चेन, चांदी का कड़ा, अंगूठी बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि बरामद सामान और नकदी को मामले से संबंधित साक्ष्यों के रूप में जांच में शामिल किया गया है। यह मामला एक बार फिर सामने लाता है कि फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराने और उनसे रकम ऐंठने के लिए अपराधी किस तरह सरकारी पहचान और वर्दी का दुरुपयोग कर सकते हैं। पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनके नेटवर्क की भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

