ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “इनोवेशन एंड प्रोटोटाइप वैलिडेशन, वैल्यू प्रपोजिशन फिट एवं बिजनेस फिट” विषय पर एक प्रभावी कार्यशाला का आयोजन किया गया। नायडू हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में बी.टेक., एमबीए के विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्टार्टअप इकोसिस्टम की बारीकियों को समझा।
नवाचार को बाज़ार तक पहुंचाने की जरूरत : डॉ. मयंक गर्ग
कार्यक्रम का शुभारंभ आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक एवं इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) के अध्यक्ष डॉ. मयंक गर्ग के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल नए विचार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक, उपयोगी और बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने विद्यार्थियों से उद्यमशील सोच विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि सफल स्टार्टअप के लिए प्रोटोटाइप वैलिडेशन, ग्राहक की आवश्यकता की समझ और बिजनेस मॉडल की व्यवहार्यता बेहद महत्वपूर्ण है।
राहुल पांडे ने साझा किए सफल स्टार्टअप के अनुभव
कार्यशाला के मुख्य वक्ता श्री राहुल पांडे, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पल्पी डाइव प्रा. लि., ने नवाचार की पूरी यात्रा को सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किसी भी उत्पाद या सेवा को बाजार में लॉन्च करने से पहले ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों को समझना, अपने विचारों की जांच करना और उपयोगकर्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर लगातार सुधार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से मजबूत उत्पाद तभी सफल माना जाएगा, जब वह समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान करते हुए ग्राहकों के लिए उपयोगी साबित हो।
वैल्यू प्रपोजिशन और बिजनेस फिट की दी विस्तृत जानकारी
विशेषज्ञ वक्ता ने वैल्यू प्रपोजिशन फिट और बिजनेस फिट की अवधारणाओं को विस्तार से समझाते हुए बताया कि उद्यमियों को अपने लक्षित ग्राहकों की पहचान, उनकी समस्याओं का विश्लेषण तथा उनके अनुरूप समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने राजस्व मॉडल, बाजार की मांग, विस्तार की संभावनाएं, लागत प्रबंधन, वितरण प्रणाली और दीर्घकालिक व्यवसायिक स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की। वास्तविक स्टार्टअप उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि व्यवस्थित वैलिडेशन व्यवसायिक जोखिमों को कम करने और सफलता की संभावनाओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने पूछे अहम सवाल
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने स्टार्टअप वैलिडेशन, ग्राहक अधिग्रहण, मार्केट टेस्टिंग, प्रोटोटाइप विकास, फंडिंग और व्यवसाय विस्तार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। श्री राहुल पांडे ने अपने उद्यमी अनुभवों के आधार पर सभी सवालों के व्यावहारिक और उपयोगी उत्तर दिए, जिससे पूरा सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बन गया।
डॉ. राजीव रंजन ने व्यक्त किया आभार
कार्यक्रम का समापन इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) के संयोजक डॉ. राजीव रंजन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई दिशा एवं प्रेरणा मिली है। उन्होंने संस्थान प्रबंधन, संकाय सदस्यों, आयोजन समिति और सभी प्रतिभागियों को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की अपील की।
युवा नवप्रवर्तकों के लिए साबित हुई उपयोगी कार्यशाला
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को इनोवेशन वैलिडेशन, ग्राहक-केंद्रित उत्पाद विकास, वैल्यू प्रपोजिशन डिज़ाइन और बिजनेस मॉडल वैलिडेशन की गहन जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम ने युवा नवप्रवर्तकों को अपने विचारों को वैज्ञानिक तरीके से परखकर उन्हें सफल, टिकाऊ और विस्तार योग्य स्टार्टअप में बदलने की दिशा में प्रेरित किया। साथ ही, इस पहल ने आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के नवाचार एवं स्टार्टअप पारितंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

