गुरुग्राम/नोएडा, द न्यूज क्लिक। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर मेदांता अस्पताल ने देशभर में वायरल हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय रहते बीमारी की पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया। इस अभियान के तहत मेदांता की विभिन्न इकाइयों में 1,200 से अधिक लोगों की हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग की गई। अस्पताल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि समय पर जांच, टीकाकरण और उचित उपचार के माध्यम से हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
भारत में करोड़ों लोग हेपेटाइटिस से प्रभावित
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और 60 से 120 लाख लोग हेपेटाइटिस-सी के दीर्घकालिक संक्रमण से प्रभावित हैं। दोनों संक्रमण सीधे लिवर पर असर डालते हैं और यदि समय रहते इनका पता नहीं चलता, तो यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस-बी को टीकाकरण और एंटीवायरल उपचार के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि हेपेटाइटिस-सी का आधुनिक दवाओं से पूर्ण उपचार संभव है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में संक्रमित लोग अपनी बीमारी से अनजान रहते हैं, जिससे समय पर इलाज नहीं हो पाता।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर चला विशेष स्क्रीनिंग अभियान
मेदांता द्वारा आयोजित इस विशेष अभियान के तहत लोगों को हेपेटाइटिस की जांच, शुरुआती पहचान और बचाव के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि यदि बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो गंभीर लिवर रोगों की आशंका को काफी कम किया जा सकता है। इस पहल के जरिए नागरिकों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और अपने लिवर की सेहत के प्रति सजग रहने का संदेश भी दिया गया।

डॉ. नीरज सराफ बोले— एक साधारण जांच बचा सकती है जान
मेदांता गुरुग्राम के हेपेटोलॉजी विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. नीरज सराफ ने कहा “वायरल हेपेटाइटिस भारत में सबसे कम पहचान की जाने वाली बीमारियों में से एक है, क्योंकि अधिकांश मामलों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार वर्षों बाद थकान, जोड़ों में दर्द या पीलिया जैसे लक्षण सामने आते हैं। अच्छी बात यह है कि हेपेटाइटिस-सी का आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से पूरी तरह इलाज संभव है, जबकि हेपेटाइटिस-बी का भी सही उपचार और नियमित निगरानी के जरिए प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है। एक साधारण रक्त जांच भविष्य में सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि जोखिम वाले सभी व्यक्तियों को समय-समय पर हेपेटाइटिस की जांच अवश्य करानी चाहिए।
कई शहरों में आयोजित किए जा रहे हैं स्क्रीनिंग कैंप
मेदांता ने बताया कि स्क्रीनिंग अभियान चरणबद्ध तरीके से विभिन्न शहरों में आयोजित किया जा रहा है। 28 जुलाई: गुरुग्राम और लखनऊ
- 29 जुलाई: नोएडा और पटना
- 30 जुलाई: रांची
- 31 जुलाई: इंदौर
- 1 अगस्त: गुरुग्राम (गोल्फ कोर्स रोड मेडिक्लिनिक) और दिल्ली (डिफेंस कॉलोनी मेडिक्लिनिक), इन शिविरों में लोगों को हेपेटाइटिस की जांच के साथ-साथ बचाव, टीकाकरण और उपचार संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
रोकथाम ही सबसे बड़ा बचाव
मेदांता का कहना है कि हेपेटाइटिस के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता, समय पर जांच और टीकाकरण है। अस्पताल ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे किसी जोखिम समूह में आते हैं या उन्हें लंबे समय से लिवर संबंधी कोई समस्या है, तो बिना देर किए जांच कराएं और चिकित्सकीय सलाह लें। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर शुरू की गई यह पहल न केवल लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक कर रही है, बल्कि देश में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

