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Friday, August 21, 2026
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    Fortis Hospital News : फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की बड़ी सफलता, हाई-रिस्क इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी से बचाई मरीज की जान, 10% से बढ़कर 45% हुई हार्ट की पंपिंग क्षमता, गंभीर कार्डियोजेनिक शॉक की स्थिति में पहुंचे थे मरीज, 15 मिनट की प्रक्रिया बनी जीवनरक्षक, क्या बोले डॉ. शांतनु सिंघल

    फोर्टिस नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. शानू शर्मा ने कहा कि यह सफलता अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाले हृदय रोगियों के उपचार में अस्पताल की विशेषज्ञता और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि केवल 10 प्रतिशत हार्ट फंक्शन वाले मरीज को 45 प्रतिशत तक रिकवर करना चिकित्सकीय टीम की दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता और उन्नत कार्डियक केयर का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के हृदय रोग विशेषज्ञों ने एक अत्यंत जटिल और जीवनघाती मामले में हाई-रिस्क इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी कर 57 वर्षीय मरीज को नया जीवन दिया। अस्पताल में भर्ती के समय मरीज का इजेक्शन फ्रैक्शन (EF), जो हृदय की पंपिंग क्षमता को दर्शाता है, केवल 10 से 15 प्रतिशत था। समय रहते किए गए बहु-स्तरीय उपचार और विशेषज्ञ हस्तक्षेप से मरीज की हार्ट पंपिंग क्षमता बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

    गंभीर कार्डियोजेनिक शॉक की स्थिति में पहुंचे थे मरीज

    मरीज को पिछले 24 घंटे से सीने में भारीपन, सांस लेने में गंभीर तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरने की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया। वह पहले से अनियंत्रित मधुमेह, उच्च रक्तचाप और गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थे। अस्पताल पहुंचने पर उनका रक्तचाप लगातार अस्थिर था और स्थिति तेजी से बिगड़ रही थी। चिकित्सकों ने तत्काल उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा और आवश्यक आपातकालीन दवाओं के माध्यम से उनकी स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया।

    तीन प्रमुख धमनियां थीं अवरुद्ध

    जांच में पता चला कि मरीज की हृदय की तीन प्रमुख धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था। अत्यंत कम हार्ट फंक्शन और एक्यूट हार्ट फेलियर की स्थिति में सामान्य एंजियोप्लास्टी करना बेहद जोखिमपूर्ण था, क्योंकि किसी भी समय कार्डियक अरेस्ट की आशंका बनी हुई थी। ऐसी गंभीर परिस्थिति में डॉक्टरों ने पहले इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (IABP) की सहायता से हृदय को सपोर्ट दिया, जिससे मरीज की स्थिति स्थिर हो सकी। इसके बाद इमरजेंसी एंजियोग्राफी कर उपचार की रणनीति तैयार की गई।

    15 मिनट की प्रक्रिया बनी जीवनरक्षक

    दो दिनों तक आईसीयू में गहन निगरानी के बाद विशेषज्ञ टीम ने केवल 15 मिनट में हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी कर मुख्य धमनी में मौजूद अवरोध को सफलतापूर्वक दूर कर दिया। उपचार के बाद मरीज ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और अगले ही दिन उन्हें वेंटिलेटर तथा हार्ट-असिस्ट पंप से हटा दिया गया। एक सप्ताह के भीतर उनका इजेक्शन फ्रैक्शन 10–15 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गया और आगे चलकर यह 45 प्रतिशत तक पहुंच गया।

    अब सामान्य जीवन जी रहे हैं मरीज

    मरीज को सफल उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वर्तमान में वह नियमित फॉलो-अप पर हैं और उन्हें किसी प्रकार की हृदय संबंधी परेशानी नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार कार्डियक रिहैबिलिटेशन पूरा होने के बाद वह अपने पेशेवर जीवन में भी सामान्य रूप से लौट सकेंगे।

    क्या बोले डॉ. शांतनु सिंघल

    फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शांतनु सिंघल ने कहा

    “जब मरीज हमारे पास पहुंचे, तब उनका हार्ट फंक्शन केवल 10 प्रतिशत के आसपास था। फेफड़ों में पानी भर चुका था और ब्लड प्रेशर 200/100 तक पहुंच गया था। हमने पहले स्पेशलाइज्ड हार्ट-असिस्ट पंप से उनकी स्थिति स्थिर की और फिर लो-डाई तकनीक का उपयोग करते हुए अवरुद्ध धमनी को खोला। समय पर किए गए इस हस्तक्षेप ने संभावित कार्डियक अरेस्ट को टाल दिया और मरीज का हार्ट फंक्शन उल्लेखनीय रूप से सुधरा।”

    मेडिकल डायरेक्टर ने जताई टीम की सराहना

    फोर्टिस नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. शानू शर्मा ने कहा कि यह सफलता अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाले हृदय रोगियों के उपचार में अस्पताल की विशेषज्ञता और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि केवल 10 प्रतिशत हार्ट फंक्शन वाले मरीज को 45 प्रतिशत तक रिकवर करना चिकित्सकीय टीम की दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता और उन्नत कार्डियक केयर का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    समय पर इलाज है सबसे बड़ा बचाव

    विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि यदि लगातार सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक थकान या अचानक पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और विशेषज्ञ उपचार से गंभीर हृदय रोगों में भी मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

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