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Wednesday, July 22, 2026
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    “64.7% मुआवजा मिला, लेकिन 4% प्लॉट का अब भी इंतज़ार!, 44 गांवों के किसानों का बड़ा ऐलान—20 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर होगा एक दिवसीय अनशन

    64.7% compensation received, but 4% plot is still waiting!, Big announcement of farmers of 44 villages—on July 20, there will be a one-day fast on Greater Noida Authority

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक।
    ग्रेटर नोएडा के 44 गांवों के उन किसानों ने, जिन्हें अब तक अपने शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड का लाभ नहीं मिल सका है, एक बार फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। किसानों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आरोप लगाया कि वर्ष 2011 में हुए समझौते और उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने हजारों किसानों के साथ वादा निभाने के बजाय भेदभाव किया। किसानों का कहना है कि उन्हें मूल मुआवजे का 64.7 प्रतिशत तो दिया गया, लेकिन विकसित भूखंड के मामले में केवल 6 प्रतिशत प्लॉट देकर शेष 4 प्रतिशत प्लॉट रोक लिया गया, जबकि तत्कालीन अधिकारियों ने सभी किसानों को 10 प्रतिशत विकसित भूखंड देने का आश्वासन दिया था। अब वर्षों के इंतजार के बाद किसानों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    2011 के समझौते का हवाला, किसानों ने उठाए गंभीर सवाल

    प्रेस वार्ता में किसानों ने बताया कि वर्ष 2011 में ‘गजराज एवं अदर्स’ मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए प्रभावित किसानों को मूल मुआवजे का 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और 10 प्रतिशत विकसित भूखंड देने का आदेश दिया था। इसके बाद जिन किसानों ने न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटाया था, उन्होंने भी अपने अधिकारों के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। उसी दौरान तत्कालीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एवं चेयरमैन रमारमन और किसानों के बीच बातचीत हुई।

    किसानों का दावा है कि उस समय यह सहमति बनी थी कि विकास कार्य प्रभावित न हों और कानूनी विवाद आगे न बढ़े, इसलिए कोर्ट न जाने वाले किसानों को भी 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि इसी भरोसे पर कई लोगों ने न्यायालय जाने का निर्णय वापस ले लिया।

    “6 प्रतिशत देकर 4 प्रतिशत रोक लिया गया”

    किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण ने समझौते का पूरी तरह पालन नहीं किया। उन्हें 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा तो दे दिया गया, लेकिन विकसित भूखंड के मामले में केवल 6 प्रतिशत प्लॉट ही आवंटित किए गए। बाकी 4 प्रतिशत विकसित भूखंड आज तक नहीं दिए गए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि उनके साथ किया गया अन्याय और वादाखिलाफी है। उनका कहना है कि वर्षों से वे अपने वैधानिक अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है।

    एक वर्ष से लगातार चला रहे हैं अभियान

    किसानों ने बताया कि पिछले लगभग एक वर्ष से शेष 4 प्रतिशत प्लॉट की मांग को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और शासन स्तर तक अपनी बात पहुंचाने के प्रयास किए गए।
    किसानों के अनुसार उन्होंने क्षेत्र के सांसद, विधायक, अन्य जनप्रतिनिधियों, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और गौतमबुद्ध नगर कलेक्ट्रेट को कई बार ज्ञापन सौंपे हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की गई है।

    मौन जुलूस के बाद अब अनशन का ऐलान

    किसानों ने बताया कि पहले भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर मौन जुलूस निकालकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाई गई थी। लेकिन जब इसके बाद भी कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया तो अब आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का फैसला किया गया है। किसानों ने घोषणा की कि 20 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर एक दिवसीय अनशन आयोजित किया जाएगा। इस अनशन के माध्यम से सरकार और प्राधिकरण का ध्यान किसानों की लंबे समय से लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया जाएगा।

    समस्या हल नहीं हुई तो जनप्रतिनिधियों के आवास पर होगा धरना

    प्रेस वार्ता में किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 20 जुलाई के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। किसानों ने कहा कि वे क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के आवास के बाहर भी शांतिपूर्ण अनशन और धरना देने के लिए विवश होंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं है, बल्कि अपने वैधानिक और न्यायोचित अधिकार को प्राप्त करना है।

    “यह अधिकार है, किसी की कृपा नहीं”

    किसानों ने कहा कि शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड उनकी मेहनत, जमीन और न्यायालय के आदेश से जुड़ा अधिकार है। इसे किसी प्रकार की रियायत या कृपा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि वर्षों से अधिग्रहित भूमि पर शहर विकसित हो चुका है, लेकिन जिन किसानों ने अपनी जमीन विकास के लिए दी, वे आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    किसानों ने सरकार और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की कि मामले का शीघ्र समाधान निकालकर सभी पात्र किसानों को शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटित किए जाएं, ताकि वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो सके।
    उन्होंने विश्वास जताया कि शासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लेकर न्याय सुनिश्चित करेगा।

    संतराम प्रधान, मोहित समाजसेवी, अमित भाटी, राजीव शर्मा,जगराम भाटी, सुरेश भाटी, भीम सिंह,चरन सिंह व अन्य शेष 4% पीड़ित किसान

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