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Wednesday, August 19, 2026
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    Sharda University News : “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से शारदा यूनिवर्सिटी का हरित संदेश, 500 पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प, युवा पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता : प्रो-चांसलर वाई.के. गुप्ता

    प्रो-चांसलर श्री वाई.के. गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियान समाज में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते हैं और लोगों को पौधों की देखभाल के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है कि वे विद्यार्थियों को वृक्षारोपण के महत्व से अवगत कराएं और उनमें पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण की जिम्मेदारी विकसित करें।

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और मातृ सम्मान का संदेश देते हुए शारदा यूनिवर्सिटी के छात्र कल्याण विभाग एवं एस्टेट विभाग ने संयुक्त रूप से नॉलेज पार्क स्थित परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर में 500 से अधिक पौधे लगाए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों और कर्मचारियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और माताओं के सम्मान की भावना को भी मजबूत करना था।

    कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सामूहिक रूप से नीम, पीपल, जामुन, अमरूद, आम सहित अनेक उपयोगी एवं पर्यावरण के लिए लाभकारी प्रजातियों के पौधे रोपे। सभी प्रतिभागियों ने पौधों की नियमित देखभाल करने का भी संकल्प लिया, ताकि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित न रहकर दीर्घकालीन पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बन सके।

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    औषधीय और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का किया गया चयन

    इस अभियान के लिए लगाए गए पौधों का चयन उनके पर्यावरणीय, औषधीय और स्वास्थ्य संबंधी महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया। नीम अपने औषधीय गुणों तथा वातावरण को शुद्ध करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। पीपल को चौबीसों घंटे ऑक्सीजन प्रदान करने वाले प्रमुख वृक्षों में माना जाता है। जामुन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ मधुमेह नियंत्रण और पाचन में सहायक माना जाता है। अमरूद विटामिन-सी और फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत है, जबकि आम, जो भारत का राष्ट्रीय फल है, पोषण और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इन पौधों से परिसर की हरियाली बढ़ने के साथ-साथ जैव विविधता, स्वच्छ वातावरण और सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) को भी मजबूती मिलेगी।

    युवा पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता : प्रो-चांसलर वाई.के. गुप्ता

    इस अवसर पर प्रो-चांसलर श्री वाई.के. गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियान समाज में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते हैं और लोगों को पौधों की देखभाल के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है कि वे विद्यार्थियों को वृक्षारोपण के महत्व से अवगत कराएं और उनमें पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण की जिम्मेदारी विकसित करें। यदि शिक्षा के साथ पर्यावरणीय मूल्यों को जोड़ा जाए तो आने वाली पीढ़ी प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील बनेगी।

    युवा पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता : प्रो-चांसलर वाई.के. गुप्ता

    पौधों को रिश्तों से जोड़ने की जरूरत : डॉ. सिबाराम खारा

    वाइस चांसलर डॉ. सिबाराम खारा ने कहा कि समाज में वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति किसी पौधे को अपनी मां, परिवार या किसी प्रिय संबंध से जोड़कर लगाएगा, तो उसके संरक्षण की भावना स्वतः विकसित होगी। यही सोच पर्यावरण संरक्षण को स्थायी रूप से सफल बना सकती है।

    बड़ी संख्या में शामिल हुए शिक्षक और कर्मचारी

    वृक्षारोपण कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, डीन, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं कर्मचारी शामिल हुए। इस अवसर पर डॉ. आर.सी. सिंह, डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. प्रमोद कुमार, एस्टेट हेड सुश्री सत्यम, डॉ. यशोधरा, डॉ. अन्विति गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने यह संकल्प भी लिया कि लगाए गए सभी पौधों की नियमित देखभाल की जाएगी, ताकि वे भविष्य में घने वृक्ष बनकर स्वच्छ वातावरण, जैव विविधता और हरित परिसर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि शारदा यूनिवर्सिटी भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता और सतत विकास से जुड़े ऐसे सामाजिक एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी, ताकि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक बनाया जा सके।

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