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Wednesday, August 19, 2026
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    GBU University News : ‘आयुर्वेद से AI तक’… GBU में गूंजा भारतीय ज्ञान का वैश्विक स्वर, दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विद्वानों ने किया मंथन, स्वास्थ्य, शिक्षा और आयुर्वेद पर विशेष चर्चा, भारतीय दर्शन और AI पर वैश्विक दृष्टिकोण, 26 जुलाई को होगा सम्मेलन का समापन

    चर्चा में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्रो. भूषण पटवर्धन ने भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित स्वास्थ्य प्रणाली, समग्र शिक्षा और मानव कल्याण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार रखे। अपने संबोधन में प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल प्राचीन विरासत नहीं, बल्कि मानवता के समग्र विकास, वैज्ञानिक सोच, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का मजबूत आधार है।

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    गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) और आईकेएस हेरिटेज एसोसिएशन (IKSHA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वितीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन-2026 के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems-IKS) के विविध आयामों पर देश-विदेश के विद्वानों ने गहन मंथन किया। 24 से 26 जुलाई तक चल रहे इस तीन दिवसीय सम्मेलन की थीम “IKS: Re-Weaving the Threads of Knowledge” रखी गई है, जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए नई शैक्षणिक और शोध संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करना है।

    सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न समानांतर तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा और प्लेनरी व्याख्यान आयोजित किए गए। इनमें समाज एवं संस्कृति, भारतीय दर्शन, चेतना और अधिगम, परफॉर्मिंग आर्ट्स, ज्योतिष एवं गणितीय परंपराएं, विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों में भारत के साथ-साथ कई देशों से आए शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक उपयोगिता और समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए।

    स्वास्थ्य, शिक्षा और आयुर्वेद पर विशेष चर्चा

    सम्मेलन के दौरान आयोजित “स्वास्थ्य एवं कल्याण” विषयक पैनल चर्चा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस सत्र का संचालन अमृता विश्व विद्यापीठम के प्रो. राममनोहर पुथियेदथ ने किया। चर्चा में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्रो. भूषण पटवर्धन ने भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित स्वास्थ्य प्रणाली, समग्र शिक्षा और मानव कल्याण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार रखे। अपने संबोधन में प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल प्राचीन विरासत नहीं, बल्कि मानवता के समग्र विकास, वैज्ञानिक सोच, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि समय की आवश्यकता है कि आयुर्वेद, योग और भारतीय वैज्ञानिक परंपराओं को आधुनिक अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाए।

    उन्होंने जानकारी दी कि लगभग छह वर्ष पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में उन्होंने “आयुर्वेद बायोलॉजी” विषय की शुरुआत की थी, जिसे व्यापक शैक्षणिक सराहना मिली। अब इसी शैक्षणिक सत्र से गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में भी आयुर्वेद बायोलॉजी विषय का अध्ययन प्रारंभ किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वित अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।

    भारतीय दर्शन और AI पर वैश्विक दृष्टिकोण

    सम्मेलन के दूसरे प्लेनरी व्याख्यान में अमेरिका से आए प्रसिद्ध विद्वान प्रो. स्थनेश्वर तिमलसिना ने “Diversifying Indic Philosophical Thinking” विषय पर व्याख्यान देते हुए भारतीय दार्शनिक चिंतन की समृद्ध परंपरा, उसकी समावेशी प्रकृति और वैश्विक बौद्धिक विमर्श में उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। इसके अलावा एपिस्टेमोलॉजी, कॉग्निटिव फ्रेमवर्क्स, साइंस, टेक्नोलॉजी, भारतीय ज्ञान प्रणाली, उपनिवेशवाद से मुक्ति, सार्वजनिक नीति और सतत विकास जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए।

    26 जुलाई को होगा सम्मेलन का समापन

    तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन 26 जुलाई को विभिन्न तकनीकी सत्रों, समापन समारोह तथा भविष्य की सहयोगात्मक शोध पहलों की घोषणाओं के साथ होगा। सम्मेलन में भारत सहित अनेक देशों के शिक्षाविद, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शोध, नवाचार और वैश्विक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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