नोएडा, द न्यूज क्लिक। नोएडा के थाना फेस-3 पुलिस ने साइबर अपराधियों को फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें देशभर में सक्रिय साइबर ठगों को उपलब्ध कराता था। इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने में किया जा रहा था।
74 जिलों की साइबर ठगी से जुड़े मिले बैंक खाते
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों का विश्लेषण करने पर पता चला कि ये खाते देश के 74 जिलों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े हुए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर अपराधियों की मदद कर रहा था।
सात आरोपी गिरफ्तार, कई दस्तावेज बरामद
पुलिस ADCP स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजब सिंह, प्रदीप, गुलाब सिंह लोधी, कौशल, सचिन, जिनेंद्र सिंह और प्रियंका के रूप में हुई है। सभी आरोपियों को गोपनीय सूचना और बीट पुलिसिंग के दौरान थाना फेस-3 क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने:
- 7 मोबाइल फोन
- 1 चेकबुक
- 4 फर्जी कंपनियों के लेटरहेड
- 1 स्टांप बरामद किया है।
फर्जी कंपनियां बनाकर खुलवाते थे खाते
एडीसीपी स्वतंत्र देव सिंह के अनुसार जांच में पता चला कि आरोपी पहले फर्जी कंपनियां तैयार करते थे और उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में चालू खाते खुलवाते थे। बाद में इन खातों को साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था या किराये पर उपलब्ध कराया जाता था, ताकि ठगी की रकम इन खातों में जमा कराई जा सके और वास्तविक अपराधियों तक पुलिस आसानी से न पहुंच सके।
व्हाट्सएप और टेलीग्राम कॉल से करते थे ठगी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल व्हाट्सएप और टेलीग्राम कॉल के माध्यम से लोगों को झांसे में लेकर करते थे। आरोपी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते थे। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देकर भी लोगों से बड़ी रकम ठगते थे।
साइबर नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और उन साइबर अपराधियों की तलाश में जुटी है, जिन्हें ये म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराए जाते थे। बरामद मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक या कंपनी के दस्तावेज किसी को उपलब्ध न कराएं। साथ ही डिजिटल अरेस्ट, निवेश या ट्रेडिंग के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और संदेशों से सतर्क रहें तथा किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करें।

